:- रवि शंकर अमित!
बिहार सरकार चाहे जीतने दावे करे, लेकिन बिहार के सरकारी अस्पताल अस्पताल कम और पोस्टमार्टम हाउस अधिक नजर आते हैँ, स्थिति यह है की छत की परतें टूट टूट कर कभी मरीज पर गिर रही है तो कभी डॉक्टर पर, कभी छज्जा टूटकर मरीज पर गिर रहा है!
ऐसे स्वास्थ्य विभाग के सारे दावे खोखले साबित हो रहे हैँ, मरीज डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी जान हथेली पर रखकर ईलाज करने और करवाने में लगे हैँ!
मामला मोकामा के रेफरल हॉस्पिटल की है, जो बिल्कुल ही जर्जर हो चूका है, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ वैद्यनाथ कुमार ने बताया की वे जर्जर भवन की स्थिति से अधिकारीयों को एक साल पहले ही तब अवगत कराये थे ज़ब एक मुखिया जी के परिजन यहाँ दिखाने आये थे और उनपर छज्जा टूटकर गिर पड़ा था, इसके बाद भी आये दिन छत का प्लास्टर टूट कर किसी ना किसी पर गिरता रहता है, एक एक्स रे टेक्निशियन भी हाल में जख़्मी हो गया, कई बार अधिकारीयों को बोला गया लेकिन अबतक ध्यान नहीं दिया गया!
बारिश होते ही स्थिति और बदतर हो जाती है, हर जगह से छत टपकने लगता है, पानी सीढ़ियों से होकर ओपीडी से लेकर वार्ड तक में फ़ैल जाता है!
तस्वीरें भी बता रही हैँ कि रेफरल अस्पताल सिर्फ नाम का रहा गया है, यहाँ आने वाला मरीज को ठीक होने के बजाय जख़्मी होकर रेफर करने के अलावा दूसरा रास्ता नजर नहीं आता, अस्पताल की दयनीय स्थिति से लोगों में काफ़ी आक्रोश देखने को मिल रहा है!
बाइट – डॉ. वैद्यनाथ कुमार (प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी)
बाइट – एक्स रे टेक्निशियन(जख़्मी)



