बिजली संकट से जूझ रहे किसान,कुमार सर्वजीत ने सरकार को दिया अल्टीमेटम!

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रिपोर्ट :- अभिषेक कुमार!

दो दिन से किसानों को नहीं मिली सिंचाई की बिजली
तो कलेक्ट्रेट पर अनिश्चितकालीन धरना: पूर्व कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत का अल्टीमेटम, सरकार पर साधा निशाना
गया। जिले में भीषण सुखाड़, सिंचाई के लिए बिजली संकट और खेतों में सूखती फसलों के बीच पूर्व कृषि मंत्री व राजद नेता कुमार सर्वजीत ने सरकार और बिजली विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि अगले दो दिनों के भीतर किसानों को सिंचाई के लिए निर्बाध बिजली उपलब्ध नहीं कराई गई, तो वे जिला समाहरणालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की सबसे बड़ी जरूरत को नजरअंदाज कर रही है, जबकि खेतों में फसल बचाने की जंग चल रही है। कुमार सर्वजीत डीएम व बिजली अधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद ये बातें पत्रकारों से कहीं।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए कुमार सर्वजीत ने कहा कि जिले में बिजली संकट अब केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि किसानों के अस्तित्व का सवाल बन चुका है। खेत सूख रहे हैं, कृषि ट्रांसफार्मर महीनों से जले पड़े हैं और अधिकारी फोन तक उठाना जरूरी नहीं समझ रहे हैं। ऐसे में सरकार की संवेदनहीनता साफ दिखाई दे रही है।

बंद कर दी गई कृषि क्लिनिक, किसान और समाज दोनों भुगत रहे कीमत

पूर्व कृषि मंत्री ने अपनी सरकार के समय शुरू की गई कृषि क्लिनिक योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य हर प्रखंड में कृषि वैज्ञानिकों के माध्यम से किसानों को सही सलाह देना था, ताकि कीटनाशकों और उर्वरकों का संतुलित उपयोग हो सके। लेकिन सरकार ने इस योजना को आगे नहीं बढ़ाया।

‘एक लाख रुपये लेकर भी नहीं लगा पोल, एक्सईएन नहीं उठाते फोन’
कुमार सर्वजीत ने बिजली विभाग पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बोधगया विधानसभा क्षेत्र के टनकुप्पा, फतेहपुर और आसपास के इलाकों में किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। भदान गांव में कृषि फीडर का पोल लगाने के नाम पर किसानों से करीब एक लाख रुपये वसूले गए। किसानों ने 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर शपथपत्र देकर इसकी शिकायत डीएम से की है।

उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के कार्यपालक अभियंता (एक्सईएन) किसानों का फोन तक नहीं उठाते। यहां तक कि प्रभारी मंत्री की बैठक के दौरान भी उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। उन्होंने कहा कि एक ही अधिकारी वर्षों से जमे हुए हैं और मनमानी कर रहे हैं। जिले में हजारों कृषि ट्रांसफार्मर दो-दो महीने से जले पड़े हैं, लेकिन उन्हें बदलने की कोई गंभीर पहल नहीं हो रही।

हर फीडर को मिले लगातार आठ घंटे बिजली, मीडिया में आए शेड्यूल

पूर्व मंत्री ने बताया कि उन्होंने जिलाधिकारी से बिजली विभाग के वरीय अधिकारियों की बैठक बुलाने की मांग की थी। बैठक में उन्होंने सुझाव दिया कि यदि ग्रिड पर लोड अधिक है तो रोटेशन सिस्टम लागू किया जाए। हर कृषि फीडर को दिन में कम से कम आठ घंटे लगातार बिजली दी जाए ताकि किसान सिंचाई कर सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि रात आठ बजे के बाद जब बिजली की खपत कम हो जाती है, तब गांवों और शहरों को निर्बाध बिजली दी जाए। साथ ही किस पंचायत को किस समय बिजली मिलेगी, इसका दैनिक शेड्यूल अखबारों में प्रकाशित किया जाए, ताकि किसान उसी हिसाब से सिंचाई की तैयारी कर सकें।पूर्व कृषि मंत्री ने दोहराया कि यदि बिजली व्यवस्था में तत्काल सुधार नहीं हुआ और किसानों के लिए स्पष्ट बिजली शेड्यूल जारी नहीं किया गया, तो किसानों के अधिकार की लड़ाई को लेकर गया से एक बड़ा और ऐतिहासिक आंदोलन शुरू किया जाएगा।

जनता के मुद्दों से ध्यान भटका रही सरकार
कुमार सर्वजीत ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों और युवाओं के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने में लगी है। उन्होंने कहा कि मगध विश्वविद्यालय का शैक्षणिक सत्र दो साल पीछे चल रहा है, राज्य के हजारों स्कूलों में शौचालय और पेयजल की सुविधा नहीं है तथा भर्ती परीक्षाओं में लगातार पेपर लीक हो रहे हैं। इसके बावजूद सरकार इन सवालों का जवाब देने के बजाय केवल राजनीतिक बहस में उलझी हुई है।
उन्होंने कहा, “हर बार सवाल पूछा जाता है कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव कहां हैं, लेकिन कोई यह नहीं पूछता कि किसान क्यों परेशान हैं। सरकार को जनता की असली समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है।

उन्होंने पेपर लीक आंदोलन जुड़े मसले पर कहा कि पेपर लीक की तुलना यदि पेड लीक से कही जा रही है तो सही है। यह चिंता का विषय है। यह कितनी गम्भीर बात है। इसे हल्के में न लें।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हम कोई बात नहीं करना चाहते हैं। वे केवल बातें बना रहे हैं। अब युवा जाग चुका है। बीते दिनों इसका उदाहरण देश दुनिया देख चुका है।

रिपोर्ट – अभिषेक कुमार
गयाजी

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