रिपोर्ट – अमित कुमार!
इसको लेकर बिहार के अपर पुलिस महानिदेशक सुधांशु कुमार ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि अब सिपाही, हवलदार या एएसआई रैंक के किसी भी पुलिसकर्मी को सड़क पर वाहनों को रोककर उनके कागजात की जांच करने की अनुमति नहीं होगी। अब तक अक्सर देखा जाता था कि निचले स्तर के कर्मी सड़कों पर गाड़ियां रोककर लाइसेंस, आरसी, इंश्योरेंस और अन्य दस्तावेज मांगते थे, लेकिन नए आदेश के बाद इस प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
सुधांशु कुमार ने यह भी कहा कि उन्हें ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कई इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी भी खुद सड़क पर न उतरकर गाड़ी में बैठे रहते हैं या पोस्ट के अंदर से ही काम करवाते हैं। इस तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर कोई इंस्पेक्टर या उससे ऊपर का अधिकारी भी वाहन में बैठकर या एक जगह टिककर जांच करवाता पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस को निर्देश दिया गया है कि जांच और ट्रैफिक ड्यूटी के दौरान सभी अधिकारी फील्ड में मौजूद रहें और आम लोगों के सामने पारदर्शी तरीके से काम करें।
इस फैसले का मकसद पुलिस की छवि सुधारना और आम जनता को अनावश्यक परेशानी से बचाना बताया जा रहा है। कई बार सिपाही और हवलदार स्तर के कर्मियों पर पैसे मांगने या गलत तरीके से चालान काटने के आरोप लगते थे, इसी वजह से अब यह जिम्मेदारी सिर्फ इंस्पेक्टर रैंक और उससे ऊपर के अधिकारियों को दी गई है। पटना पुलिस को कहा गया है कि वे इस आदेश का कड़ाई से पालन कराएं और अगर कोई इसका उल्लंघन करता है तो तुरंत उसकी रिपोर्ट कर
कार्रवाई की जाए। आम लोगों से भी अपील की गई है कि अगर कोई निचले रैंक का कर्मी उनसे कागजात मांगे तो वे इसकी शिकायत कर सकते हैं।




