पंकज कुमार जहानाबाद
जहानाबाद के
पटना-गया रेलखंड की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाला जहानाबाद का रेलवे सुरक्षा बल आरपीएफ एवं जीआरपी थाना पिछले लगभग दो दशकों से बिना हथियार के संचालित हो रहा है। थाना में तैनात अधिकारी और जवान नियमित रूप से रेलवे स्टेशन, ट्रेनों और यात्रियों की सुरक्षा का दायित्व निभा रहे हैं, लेकिन उनके पास आत्मरक्षा और आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक शस्त्र उपलब्ध नहीं हैं।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2005 में जहानाबाद जेल ब्रेक की घटना के बाद इस आरपीएफ थाना को शस्त्रविहीन रखने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद से करीब 20 वर्ष बीत चुके हैं। इस दौरान जिले की स्थिति में काफी बदलाव आया और अब इसे उग्रवाद प्रभावित जिलों की सूची से भी बाहर किया जा चुका है। इसके बावजूद थाने को अब तक हथियार उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
इधर, पटना-गया रेलखंड पर ट्रेनों और यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ी है। श्रावणी मेला सहित विभिन्न अवसरों पर इस मार्ग पर अतिरिक्त भीड़ रहती है, जिससे सुरक्षा की जिम्मेदारी भी पहले की तुलना में अधिक हो गई है। ऐसे में बिना हथियार के ड्यूटी कर रहे आरपीएफ एवं जीआरपी जवानों की सुरक्षा और उनकी कार्यक्षमता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इस संबंध में आरपीएफ थाना प्रभारी प्रदीप कुमार यादव ने कहा कि इस विषय की जानकारी विभाग के वरीय अधिकारियों को है। उन्होंने इस पर विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार किया। अब यह देखना होगा कि रेलवे और आरपीएफ मुख्यालय इस मामले में कब निर्णय लेते हैं और जवानों को आवश्यक सुरक्षा संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं।




