रिपोर्ट – विक्रम उपाध्याय!
खगड़िया: जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाली एक बेहद दर्दनाक और हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां गरीबी और लाचारी इस कदर हावी दिखी कि एक महिला अपने पति की मौत के बाद लगातार तीन दिनों तक उनके शव के पास बैठी रही, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण अंतिम संस्कार तक नहीं करा सकी। इस दौरान न तो कोई परिजन साथ था और न ही आसपास के लोगों ने समय रहते उसकी सुध ली। तीन दिन बाद जब शव से दुर्गंध आने लगी और मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बना, तब समाज, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की संवेदनाएं जागीं और मृतक का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया गया।
घटना खगड़िया शहर से सटे रामचंद्रा वार्ड संख्या-5 की है। मृतक की पहचान मन्नु साह के रूप में हुई है। बताया जाता है कि मन्नु साह पहले दाननगर मोहल्ले में किराये के मकान में रहकर मजदूरी करते थे। बाद में वे परिवार के साथ रामचंद्रा में झोपड़ी बनाकर रहने लगे। मजदूरी कर किसी तरह परिवार का गुजारा चल रहा था, लेकिन कुछ समय पहले उन्हें कैंसर हो गया। आर्थिक तंगी के कारण उनका समुचित इलाज नहीं हो सका और बीमारी से जूझते हुए तीन दिन पहले उनकी मौत हो गई।
पति की मौत के बाद उनकी पत्नी पूरी तरह बेसहारा हो गई। घर में अंतिम संस्कार कराने तक के पैसे नहीं थे। परिवार का इकलौता बेटा दूसरे प्रदेश में मजदूरी करता है, लेकिन महिला के पास उसका मोबाइल नंबर तक नहीं था, जिससे वह बेटे को पिता की मौत की सूचना भी नहीं दे सकी। मजबूरी में वह लगातार तीन दिनों तक पति के शव के पास बैठी रोती-बिलखती रही और समाज, व्यवस्था व अपनी किस्मत को कोसती रही।
सबसे दुखद बात यह रही कि आसपास रहने वाले लोगों ने भी तीन दिनों तक इस परिवार की सुध नहीं ली। जब शव से दुर्गंध आने लगी, तब लोगों को घटना की जानकारी हुई। इसके बाद यह मामला मोहल्ले से निकलकर सोशल मीडिया तक पहुंचा और धीरे-धीरे लोगों का ध्यान इस ओर गया।
घटना की जानकारी मिलने पर वार्ड संख्या-14 के पार्षद पप्पू यादव सबसे पहले मृतक के घर पहुंचे। उन्होंने स्थानीय लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नगर प्रशासन से सहयोग की अपील की। इसके बाद नगर प्रशासन और समाजसेवियों ने आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई, जिससे मृतक का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया गया।
अंतिम संस्कार के दौरान सबसे भावुक और मार्मिक दृश्य तब देखने को मिला, जब मृतक की पत्नी ने स्वयं कफन पहनकर अपने पति की चिता को मुखाग्नि दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। हर कोई इस घटना को देखकर स्तब्ध रह गया और लोगों ने इसे मानवता को शर्मसार करने वाली घटना बताया।
यह घटना केवल एक परिवार की गरीबी की कहानी नहीं है, बल्कि समाज की संवेदनहीनता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। यदि समय रहते पड़ोसी, समाज या संबंधित लोग मदद के लिए आगे आते, तो एक पत्नी को तीन दिनों तक अपने पति के शव के साथ अकेले रहने की मजबूरी नहीं झेलनी पड़ती। आखिरकार, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और प्रशासन के सहयोग से अंतिम संस्कार तो हो गया, लेकिन यह घटना खगड़िया ही नहीं, पूरे समाज के लिए एक ऐसी कड़वी सच्चाई छोड़ गई, जो इंसानियत को आईना दिखाती है।



