रिपोर्ट-विक्रम उपाध्याय/खगड़िया
जिलाधिकारी, खगड़िया श्री विक्रम विरकर की अध्यक्षता में आज समाहरणालय सभाकक्ष में संभावित बाढ़ की स्थिति से पूर्व की जाने वाली तैयारियों के संबंध में एक महत्वपूर्ण एवं व्यापक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन), अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी, सभी संबंधित जिला स्तरीय पदाधिकारी तथा अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी द्वारा संभावित बाढ़ की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने हेतु सभी विभागों की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई तथा समयबद्ध एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में बताया गया कि खगड़िया जिला अंतर्गत 07 अंचलों की लगभग 48 पंचायतों के बाढ़ से प्रभावित होने की संभावना रहती है। वर्तमान में बागमती, कोसी एवं बूढ़ी गंडक नदियों के जलस्तर में बढ़ने (Rising Tendency) की प्रवृत्ति देखी जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा लगातार जलस्तर की निगरानी की जा रही है तथा संबंधित विभागों के साथ सतत समन्वय स्थापित रखा गया है।
संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिले में 56 मानव बाढ़ राहत शिविर तथा 139 सामुदायिक रसोई (Community Kitchen) चिह्नित किए गए हैं। इन स्थलों पर आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की तैयारी की जा रही है।
बैठक में अवगत कराया गया कि जिले के सभी तटबंधों का प्रतिदिन खैरियत प्रतिवेदन (Daily Embankment Health Report) प्राप्त किया जा रहा है, जिससे उनकी सतत निगरानी एवं किसी भी संभावित क्षति पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की कठिनाई न हो, इसके लिए सूखा राशन, खाद्यान्न, पेयजल, पशुचारा, सामुदायिक रसोई, नावों की उपलब्धता, आवश्यक मशीनरी एवं अन्य राहत सामग्रियों की पर्याप्त व्यवस्था पूर्व से ही सुनिश्चित कर ली जाए।
बैठक में बताया गया कि जिले के सभी प्रखंडों में 44 प्रकार की पशु औषधियाँ उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त मानव स्वास्थ्य सेवाओं हेतु आवश्यक दवाओं, चिकित्सकीय टीमों एवं स्वास्थ्य संस्थानों को भी पूरी तरह तैयार रखा गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
जिले में वर्तमान में लगभग 1,651 गर्भवती महिलाएँ तथा 1,537 धात्री महिलाएँ चिन्हित हैं। इनके अतिरिक्त वृद्धजन, दिव्यांगजन, गंभीर रोगियों एवं अन्य संवेदनशील वर्गों की भी पहचान की जा रही है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा सके एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि आपदा की स्थिति में त्वरित सूचना संप्रेषण प्रणाली (Early Warning System) को प्रभावी बनाए रखें तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जीविका दीदियों, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सेविकाओं एवं पंचायत स्तरीय कर्मियों के साथ सतत समन्वय स्थापित रखें।
उन्होंने सभी अंचल अधिकारियों एवं प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि नावों की उपलब्धता, ऊँचे स्थलों की पहचान, राहत शिविरों की तैयारी, पेयजल एवं स्वच्छता व्यवस्था, विद्युत एवं संचार व्यवस्था तथा आवश्यक संसाधनों का भौतिक सत्यापन समय पर सुनिश्चित करें।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि बाढ़ पूर्व सभी तैयारियाँ समय रहते पूर्ण कर ली जाएँ तथा प्रत्येक विभाग अपनी कार्ययोजना के अनुरूप जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ करे। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य संभावित बाढ़ की स्थिति में जन-धन की क्षति को न्यूनतम रखते हुए प्रभावित लोगों को त्वरित राहत एवं आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना है। सभी विभाग आपसी समन्वय एवं सतत निगरानी के साथ कार्य करें, ताकि किसी भी आपात स्थिति का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।



