रिपोर्ट – अमित कुमार!
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक नाबार्ड ने अपने 45वें स्थापना दिवस के अवसर पर पटना स्थित मुख्य कार्यालय में एक भव्य समारोह काआयोजन किया।
इस समारोह में बैंक की पिछले चार दशकों की यात्रा का स्मरण किया गया और साथ ही ग्रामीण विकास के क्षेत्र में आगामी चुनौतियों और अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता और मुख्य अतिथि के रूप में नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम सिंह उपस्थित रहे। उनके साथ नाबार्ड के वरिष्ठ अधिकारी कर्मचारी और विभिन्न विकास योजनाओं से जुड़े प्रतिनिधि भी मौजूद थे। पूरा परिसर तिरंगे और नाबार्ड के बैनरों से सजाया गया था और माहौल में उपलब्धियों के साथ आगे बढ़ने का संकल्प साफ दिखाई दे रहा था।
समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और राष्ट्रगान के साथ हुई। इसके बाद नाबार्ड की स्थापना से लेकर अब तक के सफर पर आधारित एक लघु फिल्म दिखाई गई जिसमें बैंक द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में किए गए ऋण वितरण बुनियादी ढांचे के विकास कृषि नवाचार और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यों को दर्शाया गया। मुख्य महाप्रबंधक गौतम सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि नाबार्ड केवल एक वित्तीय संस्थान नहीं है बल्कि यह ग्रामीण भारत की आकांक्षाओं को साकार करने वाला एक मजबूत स्तंभ है। उन्होंने कहा कि पिछले 45 वर्षों में नाबार्ड ने कृषि और ग्रामीण विकास को नई दिशा दी है और किसानों स्वयं सहायता समूहों सहकारी समितियों और पंचायती राज संस्थाओं के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर बदलाव लाने का काम किया है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि नाबार्ड का उद्देश्य सिर्फ ऋण देना नहीं है बल्कि सतत विकास को बढ़ावा देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना है।
स्थापना दिवस के अवसर पर नाबार्ड द्वारा किए गए प्रमुख कार्यों की विस्तृत समीक्षा भी की गई। चर्चा में बताया गया कि जल संरक्षण और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए नाबार्ड ने राज्य सरकार और विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर कई परियोजनाएं चलाई हैं। लघु सिंचाई तालाब निर्माण और जलग्रहण क्षेत्र विकास के कार्यों से किसानों को सूखे की स्थिति में भी राहत मिली है। इसी क्रम में आलू अनुसंधान के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की गई। नाबार्ड ने कृषि विज्ञान केंद्रों और अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर आलू की नई प्रजातियों के विकास भंडारण और प्रसंस्करण तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ी है बल्कि राज्य को आलू उत्पादन में अग्रणी बनने में भी मदद मिली है।
समारोह का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आगामी वित्तीय वर्ष की कार्य योजना पर चर्चा रहा। मुख्य महाप्रबंधक ने घोषणा की कि आने वाले वर्ष में नाबार्ड का विशेष फोकस महिला किसानों पर होगा। इसके लिए एक विशेष ऋण योजना तैयार की जा रही है जिसके तहत महिला किसानों को कम ब्याज दर पर आसानी से ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही उन्हें प्रशिक्षण बाजार से जोड़ने और आधुनिक कृषि तकनीकों से अवगत कराने के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जब महिला किसान आर्थिक रूप से मजबूत होंगी तो पूरे परिवार और समाज का विकास सुनिश्चित होगा। इसी सोच के साथ नाबार्ड जीविका मिशन के साथ समन्वय कर स्वयं सहायता समूहों को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में काम करेगा। इसके अंतर्गत समूहों को उद्यमिता कौशल उत्पाद की ब्रांडिंग और विपणन में सहयोग दिया जाएगा ताकि ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार के माध्यम से अपनी आय बढ़ा सकें।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने डिजिटल तकनीक के उपयोग पर भी जोर दिया। कहा गया कि कृषि में तकनीक का समावेश समय की मांग है और नाबार्ड फिनटेक स्टार्टअप्स और कृषि तकनीक कंपनियों के साथ मिलकर किसानों को डिजिटल ऋण मौसम पूर्वानुमान और बाजार की जानकारी उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रहा है। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए जैविक खेती प्राकृतिक खेती और जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने का संकल्प भी दोहराया गया।
समारोह के अंत में मुख्य महाप्रबंधक गौतम सिंह ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को नाबार्ड के मूल्यों के साथ काम करने और ग्रामीण विकास के लक्ष्य को तेजी से हासिल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नाबार्ड का 45वां वर्ष केवल एक उपलब्धि का प्रतीक नहीं है बल्कि यह आने वाले वर्षों के लिए नई ऊर्जा और नई जिम्मेदारी का प्रतीक भी है। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ और राष्ट्रगान के बाद सभी उपस्थित लोगों ने नाश्ते के साथ आपसी संवाद किया।



