“युवा तुर्क” पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर: के पुण्यतिथि पर विशेष ( 8 अप्रैल )

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प्रस्तुति – डाॅ अनमोल कुमार

“युवा तुर्क” कैसे बने?:
आपातकाल के बाद जब कांग्रेस के युवा सांसदों ने सत्ता के खिलाफ बगावत की आवाज उठाई, तो उनमें सबसे तेज आवाज थी चंद्रशेखर की। दिल्ली की राजनीति में उनकी निडरता, साफगोई और सिद्धांतों के लिए उन्हें “युवा तुर्क” कहा जाने लगा। वो सत्ता के लिए नहीं, संघर्ष के लिए राजनीति में आए थे।

जीवन और संघर्ष :
गांव के एक किसान परिवार से निकलकर चंद्रशेखर ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एम ए किया। जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़कर वो छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचे।
1975 आपातकाल: 19 महीने जेल में रहे, पर झुके नहीं
जनता पार्टी: संस्थापक सदस्यों में से एक
पदयात्रा: 1983 में कन्याकुमारी से राजघाट तक 4260 किमी की “भारत यात्रा” की। 6 महीने की इस यात्रा से उन्होंने आम जनता के दर्द को समझा

प्रधानमंत्री के रूप में 7 महीने ही बने रहे।
1990 में वीपी सिंह सरकार गिरने के बाद, कांग्रेस के समर्थन से 10 नवंबर 1990 को वो देश के 11वें प्रधानमंत्री बने। उनका कार्यकाल सिर्फ 7 महीने का रहा, पर इस छोटे समय में भी उन्होंने:
विदेश नीति: गुटनिरपेक्ष आंदोलन को मजबूती दी
आर्थिक संकट: खाड़ी युद्ध के बीच देश को आर्थिक तंगी से निकालने की कोशिश की
सामाजिक न्याय: मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने में सहयोग

उनकी सरकार गिर गई, पर उन्होंने कुर्सी के लिए समझौता नहीं किया।

विचार और विरासत :
चंद्रशेखर “समाजवादी” थे, पर “व्यवहारिक” भी। वो कहते थे – “राजनीति सेवा है, धंधा नहीं।” – भ्रष्टाचार के खिलाफ हमेशा मुखर- किसानों, गरीबों और नौजवानों के हक की बात- सत्ता से दूर रहकर भी देश की नीतियों को प्रभावित करने की ताकत

उन्होंने कभी कोई बड़ा पद नहीं मांगा। 2007 में उनके निधन तक वो “जनता के सांसद” बने रहे।

पुण्यतिथि पर संदेश
आज जब राजनीति में सिद्धांत कम और सौदेबाजी ज्यादा है, चंद्रशेखर का जीवन हमें याद दिलाता है कि राजनीति में ईमानदारी भी जिंदा रह सकती है।

उनकी पुण्यतिथि पर हमें 3 बातें सीखनी चाहिए:
निर्भीकता: गलत के सामने झुकना नहीं
त्याग: पद से बड़ा देश और जनता
जुड़ाव: भारत को जानने के लिए भारत चलना जरूरी है

मैं सत्ता के लिए पैदा नहीं हुआ, संघर्ष के लिए पैदा हुआ हूं – ये वाक्य आज भी हर युवा नेता को प्रेरणा देता है।

पुण्यतिथि पर उस “युवा तुर्क” को नमन, जिसने कुर्सी नहीं, चरित्र से राजनीति की परिभाषा बदली।
मैं ( अनमोल कुमार) भी अपना राजनीति जीवन 1983 से युवा तुर्क समाजवादी नेता पूर्व प्रधानमंत्री, चन्द्रशेखर जी के भारत यात्रा से प्रभावित होकर शुरुआत किया। पहले मोकामा प्रखण्ड में जनता पार्टी का प्रखण्ड अध्यक्ष बना। फिर जिला सचिव बनने का मौका मिला। पुन: पटना विश्वविद्यालय छात्र जनता पार्टी का अध्यक्ष और बाद में बिहार प्रदेश युवा जनता पार्टी का सचिव भी बना।

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