आरा/आशुतोष पाण्डेय!
आरा 4 जुलाई। आरा-बक्सर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-922) पर जगह-जगह दिखाई दे रही दरारों और पैचवर्क को लेकर उठ रहे सवालों के बीच एनएचएआई की ओर से निर्माण एजेंसी पीएनसी ने तकनीकी पक्ष सामने रखा है। कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार सिंह ने बताया कि सड़क पर दिख रहे सभी क्रैक निर्माण में गड़बड़ी का संकेत नहीं हैं, बल्कि कंक्रीट सड़क में यह एक सामान्य तकनीकी प्रक्रिया है। भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुसार इनकी मरम्मत की जा रही है।
उन्होंने बताया कि करीब 92 किलोमीटर लंबे कोईलवर-बक्सर फोरलेन में केवल लगभग 7 किलोमीटर हिस्से में ही दरारें पाई गई हैं। इन स्थानों की लगातार निगरानी की जा रही है और आवश्यकता के अनुसार स्थायी मरम्मत कराई जा रही है।
एनएचएआई के अनुसार सड़क की मरम्मत तीन तकनीकों—क्रैक सीलिंग, स्टेपलिंग तथा गंभीर स्थिति में पूरे कंक्रीट पैनल के प्रतिस्थापन—के जरिए की जा रही है। स्टेपलिंग को स्थायी समाधान बताते हुए कहा गया कि इसमें सरिया लगाकर सड़क को दोबारा मजबूत किया जाता है।
प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि अधिकांश दरारें उन स्थानों पर विकसित हुई हैं, जहां बालू लदे भारी ट्रकों का लगातार दबाव रहता है। नो-एंट्री व्यवस्था के कारण कई बार ट्रक घंटों सड़क और पुल पर खड़े रहते हैं। इसके अलावा ट्रकों से गिरने वाले पानी के कारण भी कुछ स्थानों पर कंक्रीट प्रभावित हुई है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर उन्होंने कहा कि कई वीडियो उस समय बनाए गए, जब संबंधित स्थानों पर मरम्मत कार्य चल रहा था। केवल क्षतिग्रस्त हिस्से को दिखाने से पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई। उन्होंने यह भी कहा कि किसी ने सीधे एनएचएआई से औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई।
सड़क किनारे हरियाली को लेकर उन्होंने बताया कि एवेन्यू प्लांटेशन के तहत करीब 25 हजार पेड़ तथा डिवाइडर में लगभग 60 हजार पौधे लगाए गए हैं। भीषण गर्मी और कुछ स्थानों पर पौधों के उखाड़े जाने के कारण नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई नए पौधे लगाकर की जा रही है।
एनएचएआई ने दावा किया है कि अगले दो महीनों के भीतर सभी आवश्यक मरम्मत कार्य पूरा कर लिया जाएगा। साथ ही एंबुलेंस सेवा, घास की कटाई, वृक्षों के रखरखाव और सड़क की नियमित निगरानी का कार्य भी लगातार जारी रहेगा। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एजेंसी तय समय सीमा में मरम्मत कार्य पूरा कर यात्रियों को सुरक्षित और सुगम सफर उपलब्ध करा पाती है या नहीं।



