भरत तिवारी एनकाउंटर में मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, बिहार सरकार और पुलिस से मांगी रिपोर्ट!

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रिपोर्ट – आशुतोष पांडेय!

आरा/ 22 जून। भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी कथित मुठभेड़ कांड में अब मामला और गरमा गया है। बिहार मानवाधिकार आयोग ने इस पूरे प्रकरण पर औपचारिक संज्ञान लेते हुए बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन से चार सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट तलब कर ली है। आयोग के इस कदम के बाद अब यह मामला सिर्फ भोजपुर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए. एम. बदर द्वारा 22 जून 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि शिकायत में यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि भोजपुर जिला, आरा की पुलिस ने हिरासत में प्रताड़ना और गोली मारकर हत्या जैसी कार्रवाई की, जिसमें भरत भूषण तिवारी की जान गई। आयोग ने शिकायत की प्रकृति को गंभीर मानते हुए स्पष्ट कहा कि मामले में संज्ञान लेने का आधार बनता है।
इन अधिकारियों से मांगी गई रिपोर्ट
मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में रिपोर्ट तलब करते हुए नोटिस जारी किया है—
बिहार के मुख्य सचिव
पुलिस महानिदेशक (DGP), बिहार
पुलिस अधीक्षक (SP), भोजपुर
आयोग ने इन सभी से चार सप्ताह के भीतर फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है।
13 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
आयोग ने इस मामले को 13 जुलाई 2026 को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। ऐसे में अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और पुलिस प्रशासन अपनी रिपोर्ट में क्या जवाब देते हैं।
मामला क्यों हुआ अहम
भरत भूषण तिवारी की मौत को लेकर पहले से ही इलाके में सवाल उठ रहे हैं। परिजनों और कई सामाजिक-राजनीतिक लोगों ने इसे कथित पुलिस मुठभेड़ बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब मानवाधिकार आयोग के संज्ञान लेने के बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया है।

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