मुहर्रम को लेकर आरा शहर में सिया समुदाय का मातमी जुलूस, “या हुसैन” की सदाओं से गूंजा माहौल!

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आरा/आशुतोष पाण्डेय

आरा, 22 जून। मुहर्रम के मौके पर सोमवार को भोजपुर जिले के आरा शहर में सिया समुदाय से जुड़े लोगों ने मातमी जुलूस निकाला। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए और इमाम हुसैन व कर्बला के शहीदों को याद करते हुए गम का इजहार किया। पूरे जुलूस के दौरान “या हुसैन”, “या अली” और “हाय हुसैन” की सदाओं से माहौल गमगीन बना रहा।
बताया जाता है कि मुहर्रम के पवित्र महीने में सिया समुदाय की ओर से परंपरागत रूप से मजलिस, मातम और जुलूस का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में आरा शहर में भी समुदाय के लोगों ने एकत्र होकर जुलूस निकाला। जुलूस में शामिल लोग काले कपड़ों में नजर आए और कर्बला की घटना को याद करते हुए मातम करते चले। कई स्थानों पर लोगों ने जुलूस का स्वागत भी किया और शांति एवं सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से होकर शहर के विभिन्न इलाकों से गुजरा। इस दौरान समुदाय के बुजुर्ग, नौजवान और बच्चे भी बड़ी संख्या में शामिल रहे। जुलूस के आगे-आगे अलम और धार्मिक प्रतीक लिए लोग चल रहे थे, जबकि पीछे मातमी धुनों और नौहाखानी के बीच अकीदतमंद सीना-ज़नी करते हुए आगे बढ़ रहे थे। मुहर्रम को लेकर शहर का माहौल पूरी तरह इबादत, अजादारी और गम में डूबा दिखाई दिया।
मुहर्रम के मद्देनजर किसी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क दिखा। जुलूस मार्ग पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी और जगह-जगह सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की जा रही थी। प्रशासनिक अधिकारियों की नजर भी पूरे आयोजन पर बनी रही, ताकि शांतिपूर्ण ढंग से धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हो सके।
सिया समुदाय के लोगों ने कहा कि मुहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी, इंसाफ, सच्चाई और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष की याद दिलाने वाला महीना है। इसी संदेश को लेकर हर वर्ष मुहर्रम में मातमी जुलूस और मजलिसों का आयोजन किया जाता है।

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