राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार और लापरवाही पर फिर चला राजस्व मंत्री का डंडा, 10 अधिकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई!

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:- रवि शंकर अमित!

  • एक वेतन वृद्धि पर रोक, छह अधिकारियों पर आरोप पत्र गठित
  • राजस्व विभाग ने किया एक माह में 60 अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई
  • रिश्वतखोरी, दाखिल-खारिज परिमार्जन में अनियमितता एवं सरकारी भूमि मामलों में गड़बड़ी और कर्तव्यहीनता का आरोप

पटना, 19 जून
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई का अभियान लगातार तेज होता जा रहा है। विभागीय मामलों की समीक्षा के क्रम में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने शुक्रवार को 10 और अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई, आरोप पत्र गठन तथा विभागीय एवं अनुशासनिक कार्यवाही को स्वीकृति प्रदान की। इस तरह राजस्व विभाग द्वारा एक माह में करीब 60 अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। माननीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि जनता से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार अथवा पद के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सबसे चर्चित मामलों में पटना सिटी की भूमि सुधार उप समाहर्ता श्रीमती अभिलाषा सिन्हा का मामला है। दाखिल-खारिज अपील वाद के निष्पादन के एवज में बिचौलिये के माध्यम से 15 लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप में उनके विरुद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए सामान्य प्रशासन विभाग को निलंबन की अनुशंसा की गई है।
इसी प्रकार हाजीपुर के तत्कालीन अंचल अधिकारी श्री मुकुल कुमार झा के विरुद्ध निगरानी थाना में दर्ज भ्रष्टाचार संबंधी कांड के आधार पर आरोप पत्र गठित किया गया है। वहीं औरंगाबाद के सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी श्री नीलकमल कुमार सिन्हा पर मुख्यालय के एक पदाधिकारी को ऑनलाइन माध्यम से रिश्वत देने का प्रयास करने के आरोप में अनुशासनिक कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया है।
सीतामढ़ी के रून्नीसैदपुर के राजस्व अधिकारी श्री विश्वामित्र खरवार पर बिना अभिलेखीय साक्ष्य के आवेदन अस्वीकृत करने तथा अमीन के माध्यम से पांच हजार रुपये रिश्वत मांगने के आरोप में आरोप पत्र गठित किया गया है। किशनगंज सदर के अंचल अधिकारी श्री राहुल कुमार पर दाखिल-खारिज मामलों को गलत तरीके से अस्वीकृत करने और भू-अभिलेखों की समुचित जांच किए बिना सरकारी भूमि को रैयती घोषित करने के आरोप पाए गए हैं। उनके विरुद्ध भी विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।
पटना के संपतचक अंचल अधिकारी श्री अमित कुमार पर दाखिल-खारिज मामलों में अनावश्यक आपत्तियां लगाने, भू-मापी प्रतिवेदन के लिए लोगों को बेवजह कार्यालय बुलाने तथा परिमार्जन आवेदनों के निष्पादन में देरी करने के आरोप में आरोप पत्र गठित किया गया है। वहीं मुजफ्फरपुर के कुढ़नी के तत्कालीन राजस्व अधिकारी श्री धीरज कुमार के विरुद्ध विभागीय कार्यों में रुचि नहीं लेने, मुख्यालय से अनधिकृत अनुपस्थिति तथा दाखिल-खारिज मामलों में अनियमितता बरतने के आरोप में विभागीय आरोप पत्र स्वीकृत किया गया है।
सहरसा में पदस्थापना के दौरान अतिक्रमण वादों में नियमों के अनुरूप आदेश नहीं देने तथा गलत तथ्यों के आधार पर वरीय अधिकारियों को गुमराह करने के आरोप में वर्तमान में बांका में पदस्थापित अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी श्री रंजीत कुमार के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही संचालित की जा रही है।
दाखिल-खारिज मामलों में अनियमितता के आरोप में समस्तीपुर की अंचल अधिकारी श्रीमती पुष्पलता कुमारी पर संचयी प्रभाव के बिना एक वेतन वृद्धि रोकने का दंड अधिरोपित किया गया है। वहीं पश्चिम चंपारण के बगहा-1 की अंचल अधिकारी श्रीमती नर्मदा श्रीवास्तव पर दाखिल-खारिज वादों को लंबित रखने, सरकारी राजस्व को क्षति पहुंचाने तथा न्यायालय के आदेशों का अनुपालन नहीं करने सहित कई गंभीर आरोपों में आरोप पत्र गठित किया गया है।
माननीय राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि जनता के हितों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध सेवा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को अपने पद का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
गौरतलब है कि विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। गत 12 जून को भी मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने आठ अंचल अधिकारियों एवं राजस्व कर्मियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई और विभागीय कार्यवाही को स्वीकृति प्रदान की थी। उन मामलों में रिश्वतखोरी, सरकारी भूमि अभिलेखों में जालसाजी, दाखिल-खारिज में अनियमितता, सरकारी भूमि की बंदरबांट तथा सेवा संबंधी कर्तव्यों में लापरवाही जैसे गंभीर आरोप शामिल थे। पिछले एक माह के दौरान विभाग में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही के विभिन्न मामलों में कुल 60 अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध दंडात्मक एवं अनुशासनिक कार्रवाई की गई है। इससे स्पष्ट है कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है।

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