अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, बिहार प्रदेश की सरकार से मांग!

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रिपोर्ट – डॉ अनमोल कुमार

पटना। ग्रीष्मावकाश में प्रशिक्षण के राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद के निर्णय को तुरन्त वापस लिया जाना चाहिए।यह निर्णय शिक्षक के मानवाधिकार का उल्लंघन है।राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण प्रशिक्षण परिषद से अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ मांग करता है कि इस निर्णय को तुरन्त वापस लिया जाय।महासंघ ने इसको लेकर राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद के निदेशक के साथ राज्य के मुख्यमंत्री,शिक्षा मंत्री एवं प्राथमिक शिक्षा निदेशक को पत्र लिखकर उक्त मांग किया है।महासंघ ने कहा है कि कार्यालय से निर्गत पत्रांक C/11-T/T-2025/2481 दिनांक 29 मई 2026 का आदेश बिहार में शिक्षको के लिए एक तरह से अत्यंत अलोकप्रिय और अव्यवहारिक आदेश है।विदित हो की 01 जून से विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश प्रारंभ है।ऐसे में अनेक शिक्षक इन अवकाश के सदुपयोग अपने परिवार के साथ पर्यटक एवं तीर्थ स्थल अथवा अपने रिश्तेदारों के यहाँ जाने के लिए पूर्व नियोजित कार्यक्रम बना रखें है।एकाएक विभाग द्वारा 29 मई को शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कतिपय कारणों से शिक्षक प्रशिक्षण में भाग नही लेनेवाले शिक्षको के लिए एक जून से प्रशिक्षण में भाग लेने का निर्देश देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण निर्देश है।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ0 आलोक कुमार सिन्हा,प्रदेश महामंत्री ज्ञानेन्द्र नाथ सिंह ने कहा कि ग्रीष्मावकाश में प्रशिक्षण कराने का निर्णय को तुरन्त वापस लिया जाना चाहिए।उन्होंने इस मामले में राज्य के मुख्यमंत्री,शिक्षा मंत्री एवं स्कूली शिक्षा के सचिव से तुरन्त हस्तक्षेप की मांग करते हुय आग्रह किया है कि प्रशिक्षण के इस निर्धारित तिथि को आगे बढा कर बिहार के शिक्षकों के साथ सम्वैधानिक न्याय कर यश का भागी बने।

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