रिपोर्ट- संतोष चौहान!
भगवानपुर पंचायत सचिव के द्वारा वगैर जांच – पड़ताल के जारी हुआ जन्म प्रमाण पत्र, पंचायत सचिव समेत मामले में संलिप्त आरोपियों के विरुद्ध होगी एफआईआर – डीएम
सुपौल :- जिले के बसंतपुर प्रखंड अंतर्गत भगवानपुर पंचायत सचिव के द्वारा वगैर जांच – पड़ताल के जन्म प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सुपौल के जिलाधिकारी सावन कुमार ने कहा कि इस मामले में पंचायत सचिव समेत संलिप्त आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाएगी।
ज्ञात हो कि भगवानपुर पंचायत के वार्ड संख्या 14 से जुड़े जन्म प्रमाण पत्र निर्गत करने के मामले में कई चौकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। मामला प्रकाश में आते ही संबंधित जन्म प्रमाण पत्र को आनन-फानन में 14 अप्रैल को ही रद्द कर दिया गया। तत्पश्चात प्रखंड विकास पदाधिकारी बसंतपुर द्वारा मुखिया, आंगनवाड़ी सेविका एवं पंचायत सचिव से स्पष्टीकरण पुछा गया, जिस पर सभी संबंधित पक्षों ने 15 अप्रैल को अपना जवाब प्रस्तुत किया। इस पुरे प्रकरण ने सरकारी व्यवस्था के पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पंचायत सचिव अभिशंकर सिंह अपने बचाव में विभिन्न प्रयास कर रहे हैं, उन्होंने रतनपुर थाने में आवेदन देकर मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की थी। हालांकि, बाद में उन्होंने यह आवेदन वापस ले लिया। थाना द्वारा आवेदन वापसी का लिखित प्रमाण भी लिया गया है, जिसमें कारण के रूप में “भूलवश आवेदन दिया जाना” बताया गया है, साथ ही गलती स्वीकार करने की बात भी सामने आई है। वही अब पंचायत क्षेत्र से पंचायत सचिव के खिलाफ तरह-तरह के बात सामने आ रहे है।
इस मामले का केंद्र बिंदु खुशी तातेर नामक एक युवती का जन्म प्रमाण पत्र है, जिसे पंचायत सचिव द्वारा बिना समुचित जांच के 31 जनवरी 2026 को निर्गत कर दिया गया। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि उक्त नाम की युवती का पता पंचायत क्षेत्र में सत्यापित नहीं हो सका। वहीं, उपलब्ध आधार कार्ड के अनुसार उसके माता-पिता का पता सूरत, गुजरात दर्ज है। इसके अलावा, युवती के आधार कार्ड में कई बार पता परिवर्तन किए जाने की बात भी सामने आई है। शैक्षणिक संस्थानों एवं जन्म प्रमाण पत्र में दर्ज पते में भी भिन्नता पाई गई है, जिससे मामला और संदिग्ध होता गया है।
पासपोर्ट कार्यालय पटना से मामला हुआ उजागर :
खुशी तातेर नाम के लड़की ने अपना पासपोर्ट के लिए आवेदन किया गया है। जिसमें जन्म प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए जाने की संदेह पर पासपोर्ट कार्यालय ने सम्बंधित विभाग से प्रमाण पत्र की सत्यता की पुष्टि के लिए जानकारी मांगी। जिसके बाद मामला उजागर हुआ।
मुखिया एवं सेविका का हस्ताक्षर स्कैन कर आवेदन पर लगाए गए थे : आरोप है कि खुशी तातेर के जन्म प्रमाण पत्र के आवेदन पर मुखिया एवं सेविका का हस्ताक्षर स्कैन कर लगाए गए है। दर्ज दोनों गवाहों का हस्ताक्षर भी फर्जी किया गया है। जबकि दोनों गवाह हस्ताक्षर नहीं बल्कि अपनी पहचान के लिए अंगूठा निशान लगाते है। वही एक पुरुष गवाह करीब एक वर्षो से मुंबई में रहकर मजदूरी करता है।
इस संबंध में जिला सांख्यिकी पदाधिकारी सुपौल आशुतोष कुमार ने बताया कि रजिस्ट्रार सह पंचायत सचिव द्वारा जो रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है, उसमें उन्होंने इस त्रुटि को “भूलवश” बताया है, जो संतोषजनक नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन प्रमाण पत्रों को रद्द किया गया है, उनकी पुनः सत्यापन रिपोर्ट देने को कहा गया है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि जो प्रमाण पत्र पहले सही माना गया, वह अब गलत कैसे हो गया। इस पर विस्तृत रिपोर्ट अब तक प्राप्त नहीं हुई है। पुनः उनसे स्पष्टीकरण एवं विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाएगी।
वहीं, जिलाधिकारी सुपौल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट कहा है कि पंचायत सचिव एवं इस प्रकरण में संलिप्त अन्य दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इसके साथ ही विभागीय कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही या अनियमितता की पुनरावृत्ति न हो।
इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं और दस्तावेज निर्गत करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं सख्ती की आवश्यकता को रेखांकित किया है।




