रिपोर्ट- अमित कुमार!
मैं बहुत स्पष्ट कहना चाहता हूं – बंगाल की सरकार और सरकार की मुखिया हिंसक वारदातों के लिए ही जानी जाती है।
जब बंगाल में चुनाव आयोग के पदाधिकारी तक सुरक्षित नहीं हैं, जब उनको भी नहीं छोड़ा गया, तो आप समझ सकते हैं कि आम जनता की क्या स्थिति होगी। फिर हिंसा होना कौन सी बड़ी बात रह जाती है?
तृणमूल कांग्रेस का इतिहास उठाकर देख लीजिए। TMC हिंसा के लिए ही जानी जाती है। चुनाव हो, पंचायत हो, या कोई और मसला हो – इनका एक ही तरीका है: डर और हिंसा।
मुर्शिदाबाद की घटना हो या उत्तर 24 परगना की, हर जगह पैटर्न एक ही है। कानून-व्यवस्था नाम की चीज बंगाल में बची ही नहीं है।
लेकिन ममता बनर्जी कहती हैं कि BJP अशांति फैला रही है? देखिए, उल्टा चोर कोतवाल को डांटे। जिनके राज में राज्यपाल को खुद हिंसा प्रभावित इलाकों में जाना पड़े, हाईकोर्ट को केंद्रीय बल तैनात करने का आदेश देना पड़े, वो दूसरों पर आरोप लगाएंगे?
हमारी मांग है कि केंद्र सरकार इस पर संज्ञान ले। लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है।




