रिपोर्ट- संतोष तिवारी!
मुजफ्फरपुर/कोलकाता, 20 मार्च 2026: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की पूर्वी क्षेत्र बेंच, कोलकाता ने मुजफ्फरपुर जिले में चंदवारा पुल के पास बूढ़ी गंडक नदी में हो रहे बड़े पैमाने पर अवैध यंत्रीकृत मिट्टी खनन के मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ता विकास कुमार पाठक द्वारा दायर पत्र याचिका पर सुनवाई करते हुए NGT ने खनन गतिविधियों की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय संयुक्त समिति गठित कर दी है।
आदेश में NGT ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामले में पर्यावरण से जुड़े गंभीर प्रश्न उठते हैं, जो राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत आते हैं। आवेदक ने आरोप लगाया है कि M/s J.M. Enterprises और अन्य द्वारा पोक्लेन उत्खननकर्ताओं का उपयोग कर नदी तट से मात्र 20-50 मीटर की दूरी पर और चंदवारा पुल से 50-100 मीटर दूर अवैध खनन किया जा रहा है। यह सस्टेनेबल सैंड माइनिंग मैनेजमेंट गाइडलाइंस-2016 तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का सीधा उल्लंघन है।
मुख्य आरोप:
- बिना पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA), खनन पट्टा या सहमति के 9,25,746 घन मीटर रेत/मिट्टी निकाली गई।
- पुनर्भरण अध्ययन (Replenishment Study) नहीं किया गया।
- खनन से नदी तट का कटाव, कृषि भूमि की हानि, डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों (खगड़िया तक) में तलछट जमाव और बाढ़ का बढ़ता जोखिम।
- चंदवारा पुल की स्थिरता को खतरा तथा स्थानीय मत्स्य पालन और फसलों को नुकसान।
- राजस्व की भारी हानि (लगभग ₹1.15-1.2 करोड़)।
आवेदक ने तत्काल अंतरिम राहत मांगते हुए खनन रोकने, मशीनरी जब्त करने, स्थल कुर्क करने तथा ₹5-10 करोड़ का पर्यावरण पुनर्स्थापना कोष बनाने की मांग की है।
NGT के प्रमुख निर्देश:
- संयुक्त समिति गठित: अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (MoEF&CC, पटना), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी और बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य शामिल।
- समिति को एक माह में साइट निरीक्षण कर रिपोर्ट देने को कहा गया, जिसमें EIA, बाढ़ जोखिम, DSR सत्यापन और डाउनस्ट्रीम प्रभाव शामिल होंगे।
- सभी उत्तरदाताओं (बिहार सरकार, BSPCB, जिला खनन अधिकारी आदि) को एक माह में जवाब दाखिल करने का निर्देश।
- मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया।
- अगली सुनवाई 19 मई 2026 को होगी।
आवेदक विकास कुमार पाठक ने कहा कि उन्होंने कई बार जिला प्रशासन को शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरटीआई से भी खनन संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हुए।
बूढ़ी गंडक नदी छोटानागपुर पठार से निकलकर मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय होते हुए खगड़िया में गंगा नदी से मिलती है। यह नदी स्थानीय कृषि, मत्स्य पालन और पारिस्थितिकी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित खनन न केवल नदी के स्वरूप को बदल रहा है, बल्कि गंगा में तलछट बढ़ाकर बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना सकता है।
यह मामला बिहार में अवैध रेत/मिट्टी खनन की लगातार बढ़ती समस्या को फिर रेखांकित करता है। NGT ने पहले भी बिहार की कई नदियों (गंगा, फल्गु आदि) में अवैध खनन पर सख्त रुख अपनाया है।
अधिक जानकारी के लिए:
NGT पूर्वी क्षेत्र बेंच, कोलकाता का आदेश दिनांक 20 मार्च 2026, मूल आवेदन संख्या 63/2026/EZ।
(यह समाचार NGT के आधिकारिक आदेश पर आधारित है। आगे की सुनवाई और समिति रिपोर्ट के बाद अपडेट दिया जाएगा।)



