नारी शक्ति वंदन अधिनियम विधेयक, भारत के महिलाओं के अधिकारों के लिये ऐतिहासिक- भाजपा!

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रिपोर्ट- अमित कुमार!

लेकर अभी जो स्थिति है वह यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 से 18 अप्रैल 2026 तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है और इस सत्र का मुख्य एजेंडा नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विशेष विमर्श करना है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस विशेष सत्र से पहले सभी सांसदों और राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर महिला आरक्षण पर व्यापक सहमति बनाने और संसद में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। असल में यह विधेयक 20 सितंबर 2023 को ही लोकसभा में पारित हो चुका था जब पक्ष में 454 वोट पड़े और विरोध में सिर्फ 2 वोट थे। कानून बनने के बाद लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित हो जाएंगी और इन आरक्षित सीटों में से एक तिहाई सीटें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए होंगी। हालांकि इसे लागू करने की शर्त यह है कि अगली जनगणना के बाद परिसीमन पूरा होना जरूरी है और सरकार की योजना इसे 2029 के लोकसभा चुनाव तक लागू करने की है। 16 अप्रैल से शुरू हो रहे विशेष सत्र में सरकार जनगणना का इंतजार किए बिना 2011 के आंकड़ों पर परिसीमन आगे बढ़ाने का प्रस्ताव ला सकती है और अगर ऐसा हुआ तो लोकसभा की सीटें 816 हो सकती हैं और 33 प्रतिशत महिला आरक्षण सीधे लागू हो जाएगा। बीजेपी महिला मोर्चा

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