रिपोर्ट- ऋषभ कुमार!
रेल बजट में बिहार की बल्ले बल्ले।बजट में बिहार को मिला 10 हजार करोड़ से अधिक की राशि।बुलेट ट्रेन का भी मिला तोहफा।
रेल बजट को लेकर रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव की प्रेस ब्रीफिंग के बाद ईसीआर के महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने भी हाजीपुर जोनल कार्यालय में पत्रकारों को सम्बोधित किया और बजट में बिहार को आवंटित हुए 10 हजार 379 करोड़ की राशि के बारे में विस्तार से जानकारी दी उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में बिहार में रेल बजट 09 गुना बढ़ा है।इतना ही नहीं बिहार में 11 सालों में 2000 किलोमीटर की नई रेल पटरियाँ बिछाई गई है।उन्होंने बताया कि दीर्घकालिक विजन के तहत सरकार ने पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ यात्री परिवहन को बढ़ावा देने के लिए शहरों के बीच सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोरों को ‘ग्रोथ कनेक्टर्स’ के रूप में विकसित करने की घोषणा की है।इनमें दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी शामिल हैं। इन प्रस्तावित कॉरिडोरों से शहरों के बीच यात्रा के समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और यात्रियों के लिए बिना किसी रुकावट के बहु-माध्यमीय आवाजाही आसान हो जाएगा।उत्तरी और पूर्वी भारत में वाराणसी से पटना होते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक हाई स्पीड रेल कॉरिडोर से वाराणसी-सिलीगुड़ी की यात्रा लगभग 2 घंटे 55 मिनट में पूरी की जा सकेगी।जीएम ने बिहार के लिए रेलवे हेतु आवंटित धनराशि का जिक्र करते हुए बताया कि 2009 से 2014 में बिहार में रेलवे के विकास के लिए प्रतिवर्ष औसतन 1,132 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में बढ़ाकर इस वर्ष 10 हजार 379 करोड़ रूपये कर दिया गया है जो कि पिछली सरकार की तुलना में 09 गुना ज्यादा है।
बाइट-छत्रसाल सिंह,महाप्रबंधक




