नीट की तैयारी कर रही मृतका के परिजनों से सांसद सुरेंद्र यादव ने की मुलाक़ात, दिया हर संभव मदद का भरोसा!

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पंकज कुमार जहानाबाद।

जहानाबाद के रहने वाली नीट की छात्रा के साथ हुई पटना में रेप के बाद हत्या का मामला अब बहुत ज्यादा तुल पड़ रहा है पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल है. इस गंभीर मामले को लेकर जहानाबाद के राजद सांसद डॉ. सुरेंद्र प्रसाद यादव पीड़िता के पैतृक गांव पतियावां पहुंचे. वहां उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया. सांसद ने पीड़िता को ‘बिहार की निर्भया’ बताते हुए कहा कि इस दुख की घड़ी में वे और उनकी पार्टी पूरी तरह से परिवार के साथ खड़ी है. उन्होंने परिजनों को विश्वास दिलाया कि वे इस मामले में हर स्तर पर न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करेंगेपरिजनों से मिलने के बाद मीडिया से बात करते हुए डॉ. सुरेंद्र प्रसाद यादव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी सरकार पर जमकर बरसे. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि बिहार में अब नीतीश सरकार का इकबाल पूरी तरह खत्म हो चुका है. सांसद ने राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज बिहार में महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं, चाहे वह घर हो, हॉस्टल हो या सड़क. उन्होंने मुख्यमंत्री के उन दावों पर भी तंज कसा, जिनमें वे अक्सर 2005 से पहले के शासनकाल की तुलना वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था से करते हैं.सांसद ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि जब शासन और पुलिस तंत्र के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है तो अब तक मुख्य दोषियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है? उन्होंने प्रशासन की मंशा पर संदेह जताते हुए कहा कि अपराधियों को तुरंत सलाखों के पीछे भेजकर सरकार को जनता और पीड़ित परिवार का भरोसा जीतना चाहिए था, लेकिन सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल बातों में सुरक्षा का दावा करती है, जबकि हकीकत में अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं.सुरेंद्र यादव ने केंद्र और राज्य सरकार के प्रसिद्ध नारे “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” पर भी निशाना साधा. उन्होंने इसे एक घिसा-पिटा और खोखला नारा बताते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को नसीहत दी कि वे इस नारे को बोलना बंद कर दें. उन्होंने सरकार से मांग की कि मृतका के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाए. सांसद ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही न्याय नहीं मिला तो वे सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेंगे और जरूरत पड़ने पर राजनीति से संन्यास लेने को भी तैयार हैं.

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