रिपोर्टर — राजीव कुमार झा!
कला-संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद का निर्देश, पर्यटन विभाग के अधिकारी ने किया निरीक्षण
शिलानाथ मंदिर, बस्ती पंचायत का दुर्गा स्थान, कमला बराज, बाबा पोखर सहित होंगे विकसित
– बिहार सरकार के पर्यटन, कला-संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद के निर्देशानुसार मधुबनी जिले के जयनगर क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में कवायद शुरू हो गया है। इसी क्रम में पर्यटन विभाग के आर्किटेक्ट सिकंदर कुमार ने विभागीय अधिकारियों, स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के साथ क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण टीम में जयनगर के सीओ अखिलेश चौधरी, सीआई दीपक कुमार, भाजपा नेता उद्धव कुंवर और राम कुमार सिंह भी शामिल थे। टीम ने दुल्लीपट्टी पंचायत स्थित प्रसिद्ध शिलानाथ धाम मंदिर, बस्ती पंचायत के ऊंचे दुर्गा मंदिर, बाबा पोखर और कमला नदी के निर्माणाधीन कमला बराज क्षेत्र का जायजा लिया है। अधिकारियों ने इन सभी स्थलों को जोड़ने वाले एक नए पर्यटन रूट की योजना पर चर्चा की। निरीक्षण के दौरान महादेव सर्किट और दुर्गा सर्किट विकसित करने के प्रस्ताव पर भी विचार-विमर्श हुआ। टीम ने संभावित साइटों का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पर्यटन विभाग के सूत्रों के अनुसार, जयनगर इंडो-नेपाल बॉर्डर पर स्थित होने के कारण यहां पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। सरकार का लक्ष्य धार्मिक और प्राकृतिक धरोहरों को जोड़कर इस क्षेत्र को सांस्कृतिक-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। कमला नदी क्षेत्र में ‘कमला महोत्सव’ आयोजित करने, बोटिंग की सुविधा विकसित करने और पिकनिक स्पॉट व रेस्टोरेंट जैसी व्यवस्थाएं शुरू करने की योजना भी विभागीय स्तर पर बनाई जा रही है। तो वहीं, जयनगर गांव स्थित बाबा पोखर और अन्य धार्मिक स्थलों को भी पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता से शामिल करने की तैयारी चल रही है। सीओ अखिलेश चौधरी ने बताया कि विभागीय टीम द्वारा सर्वे चल रहा है, जिसके आधार पर विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर पर्यटन विभाग को भेजा जाएगा। मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने भी अपने हालिया बयान में कहा था कि वे मिथिला क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को राष्ट्रीय स्तर के पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस पहल से न सिर्फ क्षेत्र की धार्मिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत को नया जीवन मिलेगा बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।




