केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री,चिराग पासवान द्वारा पटना में क्षमता निर्माण केंद्र (सीबीसी) का उद्घाटन!

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:- रवि शंकर अमित!



पटना | 30 सितंबर 2025:
केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान ने आज पटना के गांधी मैदान के पास बिस्कोमौन टॉवर में क्षमता निर्माण केंद्र (सीबीसी) का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, बिहार सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के हितधारक उपस्थित रहे। यह केंद्र प्रधान मंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) योजना के तहत स्थापित किया गया है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को कौशल विकास, प्रशिक्षण और हैंडहोल्डिंग सहायता प्रदान करना है।

सीबीसी की स्थापना एवं इसका संचालन राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टम), कुंडली द्वारा किया जा रहा है । निफ्टम, कुंडली में अनाज, दूध और दूध उत्पादों, फलों और सब्जियों एवं मांस उत्पादों के प्रसंस्करण के लिए अत्याधुनिक पायलट प्लांट हैं। इसके अलावा, संस्थान में विभागीय प्रयोगशालाएं, केंद्रीय इंस्ट्रूमेंटेशन लैब और खाद्य अनुसंधान एवं विश्लेषण केंद्र (सीएफआरए) है, जिसे एफएसएसएआई द्वारा प्राथमिक, रेफरल और राष्ट्रीय संदर्भ प्रयोगशाला के रूप में अधिसूचित किया गया है, निफ्टम का बुनियादी ढांचा और सुविधाएं पीएमएफएमई लाभार्थियों सहित विविध हितधारकों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, कौशल विकास और इनक्यूबेशन सुविधाएं प्रदान करने के लिए सबसे उपयुक्त हैं। पटना में सीबीसी की स्थापना बिहार में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों के लिए पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेगी, जिससे उनकी क्षमता बढ़ेगी और उन्हें क्रेडिट लिंकेज, प्रौद्योगिकी सहायता और बाजार के अवसरों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।

इस अवसर पर बोलते हुए, माननीय मंत्री ने खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने, प्रशिक्षित मानव संसाधन के विकास और सूक्ष्म उद्यमियों को आधुनिक तकनीकों और कार्यप्रणालियाँ से लाभ उठाने में सक्षम बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। माननीय मंत्री ने रेखांकित किया कि पटना में सीबीसी, बिहार और आसपास के क्षेत्रों में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के लिए प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, उद्यमिता विकास और ज्ञान प्रसार के केंद्र के रूप में काम करेगा। इस सीबीसी की स्थापना स्थानीय उद्यमियों को सशक्त बनाकर, एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) को बढ़ावा देकर और बिहार के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाकर ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक कदम है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बिहार राज्य लगातार विगत वर्षों से देश में सबसे अधिक परियोजनाओं की मंजूरियों के साथ पीएमएफएमई योजना के तहत एक एक अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई) ने इन योजनाओं के तहत विभिन्न परियोजनाओं को मंजूरी दी है जिसमें शामिल हैं:
प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (पीएमकेएसवाई) के तहत, 748.75 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत के साथ 15 परियोजनाएं (2 मेगा फूड पार्क; 5 कोल्ड चेन; 1 कृषि प्रसंस्करण क्लस्टर; 5 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां; और 2 खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाएं) शामिल हैं, जिसमें ₹170.60 करोड़ की अनुदान राशि सम्मिलित है।
पीएमएफएमई योजना के तहत, 27,156 लाभार्थियों को क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी के लिए सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को 1,650.64 करोड़ रुपये की राशि का ऋण स्वीकृत किया गया है। 24,924 एसएचजी सदस्यों को 90.12 करोड़ रुपये की प्रारंभिक पूंजी स्वीकृत की गई है। संजय गांधी डेयरी प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना और डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर में 4.81 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत वाले दो इनक्यूबेशन केंद्रों को मंजूरी दी गई है। 1.18 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत के साथ एक ब्रांडिंग और मार्केटिंग (बी एंड एम) परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है।
खाद्य प्रसंस्करण के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआईएसएफपीआई) के तहत बिहार राज्य में 7 स्थानों पर विभिन्न कंपनियों द्वारा 488.66 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।
इस कार्यक्रम में स्थानीय उद्यमियों और पीएमएफएमई योजना के लाभार्थियों की भागीदारी भी देखी गई, जिन्होंने इस पहल और क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण परिदृश्य को बदलने की इसकी क्षमता के लिए सराहना की।

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