रचना – अनमोल कुमार
ये जिंदगी है यारों
-कभी तानों में कटेगी,
कभी तारीफों में;
ये जिंदगी है यारों,
पल पल घटेगी !!
-पाने को कुछ नहीं,
ले जाने को कुछ नहीं;
फिर भी क्यों चिंता करते हो,
इससे सिर्फ खूबसूरती घटेगी,
ये जिंदगी है यारों पल-पल घटेगी!
बार बार रफू करता रहता हूँ,
..जिन्दगी की जेब !!
कम्बखत फिर भी,
निकल जाते हैं…,
खुशियों के कुछ लम्हें !!
-ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही…
ख़्वाहिशों का है !!
ना तो किसी को गम चाहिए,
ना ही किसी को कम चाहिए !!
-खटखटाते रहिए दरवाजा…,
एक दूसरे के मन का;
मुलाकातें ना सही,
आहटें आती रहनी चाहिए !!
-उड़ जाएंगे एक दिन …,
तस्वीर से रंगों की तरह !
हम वक्त की टहनी पर…,
बेठे हैं परिंदों की तरह !!




