आज की शाम बड़ी बोझिल है, कल की रात बड़ी कातिल है।

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पंकज का पंच

आखिर किस करवट बैठेगा ऊंट!

पंचायत चुनाव की वोट 8 अक्टूबर को डाले जाएंगे, 6 अक्टूबर शाम को वीर रस घोलने वाला भोपू भी सन्नाटे में आ जाएगा, नेताओं की शाम बड़ी बोझिल कई नेताओं को अभी से दिखने लगे हैं! तो 6 अक्टूबर के दिन से ही कई नेता जी गुपचुप तरीके से दिन में वाहनों की संख्या दनादन बढ़ाकर, एक कुनबे के संवेदनशील वोटर को अपने पाले में लाने की पुरजोर कोशिश, अंत में नेताजी कहते हैं! अच्छा छोड़ो कल 7 तारीख है! सेटिंग वेटिंग तो कल होगा ना, कल रात में हर गांव का कैंपेनिंग करना है! तो जनता जनार्दन हर एक प्रत्याशी को जीत के आशीर्वाद दे रहे हैं! अब अंतिम चरण में ऐसे में कई जनता तो जाती जमात तथा नगद नारायण के चक्कर में द्वंद में अब तक फंसे हुए हैं! अंत में नेताजी के मुंह से निकल ही जाता है आज की शाम बड़ी बोझिल है कल की रात बड़ी कातिल है! अगले ही पल नेताजी अपने को ढांढस देते हैं यहां के सब वोटर मेरे, लेकिन इस बार बिहार की राजनीति कुछ और कह रही है! बदलाव की जबरदस्त बयार बह रही है! और सभी नेता जी इसी में वैतरणी पार करने की कोशिश में लगे हुए हैं”

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