असम के तीन मजूमदार दोस्त की साइकिल से केदारनाथ यात्रा, कमाई कर रुपए इकट्ठा किए फिर की यात्रा शुरू।

SHARE:

:- रवि शंकर अमित/गोविंद कुमार!

कहते हैं कि यदि दिल में हसरत है और हौसले में ताकत तो इंसान चांद का भी सफर तय कर सकता है ताजा मामला असम के तीन मजूमदार दोस्त (राजू, बौद्धिक और आकाश मजूमदार) का है जो पहले सितंबर को अपने गृह क्षेत्र से चलकर बिहार और उत्तर प्रदेश होते हुए कई राज्यों से गुजर कर बाबा केदारनाथ जैसे दुर्गम यात्रा पर निकल चुके हैं 13 दिन में करीब 1200 से 1300 किलोमीटर की यात्रा करके शनिवार के दिन बाढ़ पटना पहुंचे जहां रात्रि विश्राम करने का मन बनाया। इस दौरान उन्होंने बताया कि पहले तो अभिभावक इस दुर्गम यात्रा के लिए मना किया करते थे लेकिन जब हम तीनों का हौसला देख तो अब उनके भी मन से हमारे प्रति भय खत्म हो गया हम तीनों दोस्त ने योजना तो पहले बनाई थी लेकिन अंजाम अब दिया है चाहे जितना भी दुर्गम रास्ता क्यों ना हो हम अपने मुकाम तक पहुंच कर रहेंगे साइकिल से हजारों किलोमीटर की यात्रा और बिना थके लगातार चलते रहने से भी जज्बा कम नहीं हो रहा है हर दिन 100 से 90 किलोमीटर के आसपास यात्रा करते हुए लगातार आगे बढ़ रहे हैं इस दौरान जब उनसे मुलाकात थी तो हमें भी उनसे बातचीत करने का मौका मिला और उनके हौसले के बारे में हम अपने दर्शकों को बता रहे हैं 18 से 20 वर्ष की उम्र के तीन दोस्त इस कदर हौसला के साथ आगे बढ़ रहे हैं जैसे उनके सामने किसी भी प्रकार की कठिनाई नहीं है उत्तराखंड पहुंचने के बाद वह वहां से केदारनाथ की यात्रा करेंगे और मनोकामना पूर्ण होने का भी भगवान भोलेनाथ से कामना करेंगे हर राज्य की संस्कृति और हर इलाके के लोगों से मिलकर इन तीनों को बेहद खुशी हो रही है और वह भी इस बरसात के मौसम में जगह-जगह कड़ाके की धूप और वर्षा का सामना करते हुए आज 13वां दिन पटना जिला के बाढ़ पहुंचे और यहां से फिर मोकामा की ओर रवाना होंगे रात हो जाने के चलते अब वह आराम करने के मूड में थे उन्होंने बताया कि हम जगह-जगह लोगों से मिलकर उनसे बातें करके और भी हौसला बढ़ाने का काम कर रहे हैं ताकि एक प्रकार का संदेश लोगों के बीच जाए की हौसला यदि मजबूत हो तो कोई भी काम कठिन नहीं है।
आकाश ने बताया कि यात्रा पर निकलने से एक महीने पहले तीनों ने मिलकर योजना बनाई फिर पैरेंट्स से रूपए मांगे और मेहनत कर रूपए कमाए और यात्रा पर निकल गए।

Join us on:

और पढ़ें