निभाष मोदी, भागलपुर

आशानंदपुर उर्दू प्राथमिक विद्यालय चल रहा भगवान भरोसे, यहां की शिक्षिका का छुट्टी लेने का तरीका है निराला,
आशानंदपुर उर्दू प्राथमिक विद्यालय सचमुच भगवान भरोसे चल रहा है, यहां के शिक्षकों की छुट्टी लेने का तरीका भी कुछ अजूबा है , शंखनाद ने पहल की और वहां के बच्चे और अभिभावक से बात किया गया, शंखनाद हर समय आपको सच दिखाने के लिए तैयार है, क्या कुछ चल रहा है इस विद्यालय में जानते हैं,
जहां सरकार बच्चे को शिक्षित करने के लिए अरबों -खरबों रुपए खर्च करने में लगी है, जहां कई योजनाओं का लाभ बच्चों को मिलता है, जहां कई गतिविधियों को बच्चों में डाला जाता है, जहा शिक्षा का अलख जगाया जाता है ,उसकी धज्जियां उड़ते आपको नजर आएगी इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है, बताते चलें शिक्षा का अलख जगाने के लिए गांव गांव तक शिक्षा लाने के लिए सर्व शिक्षा अभियान भी चालू हुआ ,
सर्व शिक्षा अभियान 2001 भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम था जिसके शुरुआत 2001–2 में अटल बिहारी वाजपेई द्वारा एक निश्चित समय अवधि के तरीके से प्राथमिक शिक्षक के सार्वभौमीकरण जैसा कि भारतीय संविधान के 86 वें संशोधन द्वारा निर्देशित किया गया है जिसके तहत 6 से 14 साल के बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के प्रावधान को मौलिक अधिकार बनाया गया है , वह तार तार होते नजर आ रही है, एक तरफसर्व शिक्षा अभियान का स्लोगन है सब पर हूं सब बढ़े सब पढ़े सब बढ़े लेकिन आसनंदपुर के बच्चे के साथ मजाक करते नजर आ रहा है !
आशानंदपुर में एक राजकीय उर्दू प्राथमिक विद्यालय जो नगर निगम क्षेत्र के भागलपुर दो में आता है, वहां की स्थिति अगर आप देख लेंगे तो शायद सरकारी शिक्षा विभाग से घृणा हो जाएगी, वहां की स्थिति इतनी बदतर है कि सर्वशिक्षा अभियान के तहत जो स्लोगन है सब पढ़े सब बढ़े को तार-तार करता दिख रहा है!
यहां मीडिया की जब पहल हुई तो गांव के लोग भी एक्टिव हुए और पता चला यह विद्यालय ज्यादातर बंद ही रहता है स्कूल खुलने का समय 10 बजे का है तो स्कूल के शिक्षक ही 11 बजे आते हैं ,अति तो तब हो गई जब बच्चे लगातार विद्यालय आ रहे हो और शिक्षक ही नदारद !ऐसा ही कुछ देखने को मिला राजकीय उर्दू प्राथमिक विद्यालय आनंदपुर के विद्यालय में ,इतना ही नहीं यहां के शिक्षकों का छुट्टी लेने का तरीका भी काफी अनोखा है यह बाहर के बोर्ड में लिखकर अपने मन की बात चले जाते हैं, जब मीडिया वहां पहुंची तो बोर्ड में लिखा हुआ नजर आया 11 सितंबर 2021 श्रीमान अवर निरीक्षक भागलपुर, अचानक मेरी पेट में अधिक दर्द होने के कारण मैं घर जा रही हूं और 11 तारीख बाद से अभी तक शिक्षिका विद्यालय नहीं वापस लौटी हैं इसकी सुध लेने वाला भी कोई नहीं,यह कैसा तरीका है छुट्टी लेने का!
मीडिया से बात करते हुए कुछ बच्चों ने कहा तबस्सुम मैडम 11:00 बजे आती ही है और ज्यादा से ज्यादा विद्यालय बंद ही रहता है ,वहीं दूसरी ओर वहां के अभिभावक का भी कहना हुआ कि मैं बच्चों को नियमित स्कूल भेजता हूं लेकिन स्कूल में ताला ही बंद रहता है, काफी लेट से विद्यालय खुलता है और इधर तो विद्यालय खुला ही नहीं है !बच्चे का कहना हुआ हम सभी विद्यालय प्रत्येक दिन आ रहे हैं लेकिन तबस्सुम मैडम आ ही नहीं रही हैं विद्यालय में ताला लगा हुआ है,अब देखना यह है कि जहां पर सरकार कई योजनाएं बना रही हैं कई खर्च कर रहे हैं क्या विद्यालय इसी तरह चलेगा या फिर इस पर अधिकारियों की कुछ पहल भी होगी!
शायद यह विद्यालय पहला नहीं होगा ऐसे कितने सरकारी विद्यालय होंगे जहां ताला लटकी रहती है और बच्चे बाहर खेलते रहते हैं, शिक्षक को बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना बिल्कुल सही नहीं है, इस पर अधिकारियों को पहल करने की जरूरत है।




