रिपोर्ट- आशुतोष पांडेय
भोजपुरी क्षेत्र का सामाजिक इतिहास दर्ज है फेर ना भेंटाई ऊ पचरुखिया में
भोजपुरी विभाग में डॉ रंजन विकास के संस्मरण पर पुस्तक परिचर्चा
वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के भोजपुरी विभाग में भोजपुरी साहित्यांगन ई लाइब्रेरी के सह संस्थापक डॉ रंजन विकास के आत्म संस्मरण पर आधारित फेर ना भेंटाई ऊ पचरुखिया पुस्तक पर परिचर्चा का आयोजन हुआ। छात्रों, शिक्षकों और भोजपुरी आंदोलन से जुड़े साहित्यप्रेमियों से खचाखच भरे नाथ सभागार में परिचर्चा की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ आलोचक जितेंद्र कुमार ने कहा कि यह किताब सिर्फ रंजन जी का आत्म संस्मरण नहीं है बल्कि भोजपुरी क्षेत्र का सामाजिक इतिहास है और रंजन जी ने समाज के हर पहलुओं और समस्याओं पर अपनी पैनी नजर डाली है। साहित्यकार रामयश अविकल और पूर्व विभागाध्यक्ष अयोध्या प्रसाद उपाध्याय ने पुस्तक में भोजपुरी की ठेठ शब्दावलियों के प्रयोग को रेखांकित किया। वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र गुंजन सिन्हा ने कहा कि इस संस्मरण को पढ़ने से यह बात साबित होती है कि भोजपुरी साहित्य एक समृद्ध साहित्य है और हर्ष की बात है कि भोजपुरी में साहित्य की हर विधा में स्तरीय लेखन हो रहा है। पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ नीरज सिंह ने कहा कि डॉ रंजन विकास जी जिस परिवार से आते हैं उस परिवार का भोजपुरी साहित्य के विकास में अभूतपूर्व योगदान रहा है और यह पुस्तक सिर्फ रंजन जी का संस्मरण नहीं बल्कि भोजपुरी साहित्य के एक युग का इतिहास है। विभागाध्यक्ष दिवाकर पाण्डेय ने पुस्तक के रोचक प्रसंगों को साझा किया तथा भोजपुरी विभाग के पुस्तकालय हेतु पुस्तक दान में रंजन जी की भूमिका की सराहना की। सीनेटर तथा पूर्व प्रोफेसर बलिराज ठाकुर ने रंजन जी को पुस्तक प्रकाशन के लिए शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन भोजपुरी छात्र संघ के संयोजक स्यंदन सुमन तथा संचालन शोधछात्र राजेश कुमार ने किया। कार्यक्रम के बाद उपस्थित साहित्यसेवियों ने भोजपुरी विभाग के पुस्तकालय में बहुमूल्य किताबों को दान देने के लिए भोजपुरी साहित्यांगन ई लाइब्रेरी तथा डॉ रंजन विकास को अपनी शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम को सफल बनाने में शोधार्थी सोहित सिन्हा, रवि प्रकाश सूरज, ढुनमुन सिंह तथा विभाग के कर्मचारियों उत्तम तिवारी, मनोज, नीलम का योगदान रहा।