चैती छठ के दूसरे दिन बुधवार को छठव्रती के द्वारा किया गया खरना पूजन!

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रिपोर्ट- सुमित कुमार!

-लोक आस्था का चार दिवस चैती छठ के दूसरे दिन बुधवार को छठव्रती के द्वारा खरना पूजा किया गया। जिसके बाद छठव्रती लगातार 36 घंटा तक निर्जला उपवास पर रहेंगे। मंगलवार को नहाए खाए के साथ किया गया था कद्दू भात का प्रसाद ग्रहण। बुधवार को खरना पूजन करने के साथ परिजनों एक साथ मिलकर खीर पुरी और रसिया से बना प्रसाद को ग्रहण किया। जिसके बाद आज तीसरे दिन गुरुवार को अस्ताचलगामी सूर्य को श्रद्धालु अर्घ्य अर्पित करेंगे। वहीं खरना पूजा कर रही कासिम बाजार मोकबीरा निवासी श्रवण कुमार की पत्नी छठ व्रति चिंता देवी ने बताई कि वह इस बार पहली बार चैती छठ कर रही है। इसका मुख्य कारण है कि उसके मंझले पुत्रवधु रोमा कुमारी ने छह पोता को जन्म दिया था। जन्म के बाद उसके पोता (बीर कुमार) को शिशा में 20 दिनों तक रखा गया। उसके बाद दिन प्रतिदिन उसकी तबीयत और खराब होने लगा। जिसके बाद पोता का भागलपुर से इलाज चलने लगा। तकरीबन 2 माह तक चिकित्सक के यहां ही रहना पड़ा। पोते की तबीयत को बिगड़ता देख उसकी दादी चिंता देवी ने भगवान भास्कर से मन्नत मांगा की अगर उसके पोता को सकुशल वापस लौटा दे तो वह छठ पूजा करेगी। इसके बाद चिकित्सक के काफी प्रयास से पोता सकुशल वापस घर आ गया। जिस कारण चिंता देवी पहली बार पोता के खेशी में छठ पूजा कर रही है और अगले पांच साल तक वह इस पर्व को करेगी। इससे पहले वे कार्तीक माह की छठ अपने मंझला पुत्र मृधल के नाम से कर रहा है। महिला छइ व्रति ने बताया कि कार्तीक माह में वह अपने बेटा के साथ गंगा नहाने गई थी। तभी उसका पुत्र नहाने के क्रम में गंगा में डूब गया। गंगा घाट पर काफी खोजबीन के बाद आधा घंटा बाद वापस गंगा किनारे ही अचानक पानी से सकुशल निकला। तब से ही वे अपने बेटा के नाम से छइ पूजा कर रही है। महिला छठ व्रति ने बताया कि उसे आस्था पर काफी विश्वास है। जिस कारण वह छठ व्रत को नियम पूर्वक अपने परिवार वालों के साथ निभा रही है।

बाइट-चिंता देवी छठ व्रती

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