रिपोर्ट- आशुतोष पांडेय!
आश्चर्य है कि सदियों बाद भी भारतीय समाज वर्ण-विभाजन के अभिशाप से पूर्ण रूपेण मुक्त नहीं हो पाया है। यही कारण है कि हम एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में उभरने से पीछे रह जाएंगे। गुरु गोविंद सिंह जातिगत भेदभाव के विरोधी थे।उक्त बातें भोजपुर जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष वीकेएसयू के सीनेटर प्रोफेसर बलिराज ठाकुर ने सिखों के दसवें और अंतिम गुरु गुरु गोविंद सिंह की जयंती पर भोजपुर जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कही। प्रोफ़ेसर ठाकुर ने गुरु जी को श्रद्धा के साथ याद करते हुए कहा कि वह एक महान दार्शनिक, प्रख्यात कवि, निडर एवं निर्भीक योद्धा, महानलेखक, अत्याचार के खिलाफ लड़ने वाले अपराजेय योद्धा और महान संत थे।वे अद्वितीय बलिदानी थे। सीनेटर संतोष तिवारी ने कहा कि गुरुजी सिख समुदाय को केस,कड़ा, कृपाल,कंघा और कच्छा अपनाने का निर्देश दिया था।1699 में बैसाखी के दिन उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की थी। सम्मेलन के प्रधानमंत्री प्रोफेसर नंद जी दुबे ने गुरु गोविंद सिंह को महान समाज सुधारक बताते हुए कहा कि उनके उपदेश आज भी प्रासंगिक हैं।कार्यक्रम का संचालन करते हुए भोजपुरी विभागाध्यक्ष पूर्व सीनेटर डॉक्टर दिवाकर पांडेय ने कहा कि गुरु जी ने अत्याचार से जूझने में अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। कार्यक्रम में कवि-आलोचक जितेंद्र कुमार,शिवदास सिंह, डॉक्टर अयोध्या प्रसाद उपाध्याय, डॉक्टर सत्यनारायण उपाध्याय,शशिकांत तिवारी, राकेश उपाध्याय, जनार्दन मिश्र,मधु मिश्र, डॉक्टर रेनू मिश्र, डॉक्टर विनोद सिंह यादव, डॉक्टर ममता मिश्र, रवि शंकर पांडेय ,अलख अनाड़ी, पिंटू सिंह सहित कई लोगों ने अपने विचार व्यक्त किये। धन्यवाद ज्ञापन डॉक्टर रवींद्र कुमार ठाकुर ने किया।




