रिपोर्टर — राजीव कुमार झा!
मधुबनी जिले में मिथिला वाहिनी का स्थापना दिवस कार्यक्रम जगह जगह आयोजित किया गया। मिथिला वाहिनी के कार्यकर्ताओं, सहयोगियों और सदस्यों द्वारा अलग-अलग जगहों पर स्थापना दिवस मनाया गया। मुख्य कार्यक्रम मिथिला वाहिनी के प्रधान कार्यालय पंडौल प्रखंड के गांव में बरे ही हर्षोल्लास और उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाया गया। जहां विद्यानंद ठाकुर की अध्यक्षता में मुख्य अतिथि मिथिला वाहिनी के संस्थापक सह मुख्य संरक्षक मिहिर कुमार झा महादेव, विशिष्ट अतिथि संरक्षक समिति के सदस्य सेवानिवृत्त सैन्य पदाधिकारी बुद्धिनाथ झा और कार्यालय प्रमुख कल्याणी कुमारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर और मां सीता के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। जय जय भैरवी के गान और जय सीता मैया, जय मातृभूमि, जय मिथिला के उद्घोष के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थापक सह मुख्य संरक्षक मिहिर कुमार झा महादेव ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं को स्थापना दिवस पर बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने अपने संबोधन मे बताया कि किस तरह और किन परिस्थितियों में मिथिला वाहिनी का निर्माण हुआ और आज मिथिला वाहिनी की शाखाएं मिथिला के अलग-अलग जिलों तथा गांवों में तेजी से बढ़ रही है। लोग मिथिला वाहिनी से जुडने को इच्छुक हैं। उन्होंने बताया कि संगठन की नींव 2015 के मकर संक्रांति के दिन 14 जनवरी को मिथिला के प्रसिद्ध स्थल मधुबनी जिला अंतर्गत पंडौल प्रखंड के अयाची शंकर डीह सरिसवपाही में रखी गई थी। लोगों के विचार से इसे पंजीकृत कराया गया।जिसे 01 सितंबर 2017 को मान्यता प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि मिथिला वाहिनी का गठन उस समय हुआ जब मिथिला के आम लोगों में, राजनीतिक एवं जन प्रतिनिधि व राजनीतिक दलों द्वारा अपनी भाषा मैथिली को कमजोर कर अन्य भाषाओं पर जोर दिया जा रहा था। सभी लोग स्थानीय समस्या को छोड़कर अपने राजनीतिक आकाओं के पिछलग्गू बन कर काम कर रहे थे। मिथिला वाहिनी ने आम मैथिल को जागरूक करते हुए वैसे जनप्रतिनिधियों तथा राजनीतिक दलो का विरोध तथा सचेत करने का कम किया जो मिथिला की संस्कृति, भाषा और विकास के साथ खिलवाड़ कर रहे थे। मिथिला वाहिनी द्वारा गांव गांव जाकर अलख जगाया गया। ‘आऊ मैथिल बनी’ के स्लोगन के साथ गांव गांव जाकर लोगों को जगाने का काम किया। जब संगठन धीरे-धीरे सशक्त हुआ तो मिथिला के चहुंमुखी विकास को लेकर गुलाबीमय मिथिला अभियान चलाकर मिथिला की धरोहर, संस्कृति और भाषा का संरक्षण तथा संवर्धन हो इसके लिए लोगों को जागरूक किया गया तथा स्थानीय समस्या के समाधान हेतु संबंधित पदाधिकारी, विभाग और जनप्रतिनिधियों पर दवाब बनाने का काम किया। श्री महादेव ने आगे बताया कि ‘हम मैथिल छी बिहार नई’ मिथिला वाहिनी द्वारा दिया गया स्लोगन है जिस स्लोगन पर बहुत बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिल्ली में धरना दिया गया। जहां एक ओर संगठन के कार्यकर्ता सामाजिक और राजनीतिक गतिविधि के माध्यम से मिथिला के चहुंमुखी विकास हेतु कार्य कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर संस्था मिथिला की संस्कृति, भाषा, धरोहर को संरक्षित और संवर्धित करते हुए लोगों को स्वरोजगार मिले, कुटीर उद्योग,अच्छी शिक्षा तथा व्यवस्थित चिकित्सा मिले और पर्यावरण संरक्षण के दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं और सहयोगियों से आने वाले समय में और अधिक मेहनत करते हुए ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिथिला वाहिनी के उद्देश्यों और गतिविधियों की जानकारी देते हुए जोड़ने का आह्वान किया। आगामी कार्यक्रम को लेकर उन्होंने कहा कि मिथिला वाहिनी आने वाले दुर्गा पूजा से गांव गांव जाकर सभी मैथिलों में अलख जगाते हुए सदस्यता अभियान शुरू करेगी। जिससे संगठन की मजबूती होगी और मैथिल जनों को इसका लाभ प्राप्त होगा। जिसकी शुरुआत मिथिला के मधुबनी जिला अंतर्गत पंडौल प्रखंड से की जायेगी। उन्होंने बताया कि आज यह तय किया गया कि संगठन के सभी दायित्वो को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाय। अतः संगठन में जो भी दायित्ववान कार्यकर्ता है यथा पंचायत प्रमुख से लेकर जिला प्रमुख तक सभी को दायित्व मुक्त किया जाता है और सदस्यता अभियान के बाद पुनः हर जगह नयी समिति का गठन किया जाएगा। संस्था के दायित्वों में कोई बदलाव अभी नहीं होगा। उन्होंने सभी लोगों से निःस्वार्थ भाव से मेहनत करते हुए संगठन तथा संस्था की मजबूती के लिए कार्य करते रहने के लिए प्रेरित किया। जिससे मिथिला सहित पुरा भारत गुलाबीमय हो। बैठक को संबोधित करते संरक्षक समिति के सदस्य बुद्धिनाथ झा ने भी सभी लोगों को बधाई देते हुए कहा कि मिथिला वाहिनी के कार्यकर्ता और संस्थापक के मेहनत और कार्यशैली से वे बहुत प्रसन्न हैं। उन्हें खुशी है कि मिथिला वाहिनी जो कहती है वह कर के दिखाती है। जब कि कई संगठन और राजनीतिक दल द्वारा सिर्फ बयानबाजी ही होता है। उन्होंने सभी मैथिलों से आग्रह किया कि वे मिथिला वाहिनी से जुड़े और मिथिला के आवाज को मजबूत करने में सहयोगी बने। वहीं अपनी अध्यक्षीय भाषण में विद्यानंद ठाकुर ने बताया कि जिस तरह मिहिर झा महादेव के कठिन परिश्रम और त्याग से मिथिला वाहिनी निरंतर मजबूत हो रही है। हम सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज मिथिला वाहिनी मैथिलों का विश्वास बन चुका है कहीं भी किसी तरह के सहयोग की बात होती है मिथिला वाहिनी के कार्यकर्ता अपनी ताकत के साथ वहां मजबूती से खड़े दिखाई दे रहे हैं। आज़ मिथिला नव वर्ष की बात हो,राजा सलहेस,वीर लोरिक, दीनाभद्री सहित और भी अन्य वीर मिथिला पुत्र विद्वान अयाची मिश्र,मंडन मिश्र,विद्यापति सहित सीता नवमी उत्सव हो मिथिला वाहिनी द्वारा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता रहा है और मैथिली भाषा, संस्कृति का प्रचार प्रसार में भी मिथिला वाहिनी तथा मिहिर कुमार झा महादेव का बड़ा योगदान है। जो मिथिला के अलग-अलग हिस्सों में जाकर तथा प्रवासी मैथिलों को भी जगाने का काम कर रहे हैं। कार्यक्रम को बैजु महतो गिरिन्द्रकर झा, शक्ति ठाकुर, कल्याणी कुमारी शरद झा आदि ने भी संबोधित किया। वही कार्यक्रम को सफल बनाने में रोहित पूर्वे,अमृत दास,पूनम देवी,मधु कुमारी, भाव्या,लक्षिता,उदय पासवान सहित कई लोगों का सहयोग सराहनीय रहा। कार्यक्रम में वाहिनी के कार्यकर्ता सहयोगी सदस्य के अलावे कुछ नये लोग भी शामिल थे। जिसमें प्रमुख रूप से शीला मंडल,फुलो देवी, अनीता देवी, पंकज झा,झुलन चौपाल,राजु चौपाल,मोहन साहु, चुनचुन देवी, राधा देवी, कंचन देवी सहित दर्जनों लोग मौजूद थे। इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराया गया। साथ ही अपने अपने घरों पर गुलाबी ध्वज लगाने हेतु संस्थापक के द्वारा सभी को भेंट किया गया। तथा दुसरे लोगो को भी इसे लगाने के लिए आग्रह करने को कहा गया। सीता मैया, मिथिला धाम और जय मातृभूमि के जयकारे के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।




