रचना – अनमोल कुमार
नेकी की राहों पे तू चल
ईश्वर रहेगा तेरे संग
नेकी की राहों पे तू चल
ईश्वर रहेगा तेरे संग
वो तो है तेरे दिल में, हाँ
तू क्यूँ बाहर उसे ढूंढता?
नेकी की राहों पे तू चल
ईश्वर रहेगा तेरे संग
कभी है वो साहिल पे
कभी है वो मौजों पे
कभी है परिंदा वो उड़ता हुआ
वो तो ईश्वर है, जीवन है, राह है
उसको ना मज़हब में कैद करना
वो वफ़ादार है, हाँ, खुद ही प्यार है
साये में उसके सुकूँ कितना
दुनिया का नूर है, ना तुमसे दूर है
पाकीज़गी में वो है बसता
रूह-ए-खुदा का है आसरा
वही तो है अपना, ये जहाँ उसका है
नेकी की राहों पे तू चल
ईश्वर रहेगा तेरे संग
वो तो है तेरे दिल में, हाँ
तू क्यूँ बाहर उसे ढूंढता?
नेकी की राहों पे तू चल
ईश्वर रहेगा तेरे संग
ईश्वर से मोहब्बत कर, उसकी पूजा कर
उसने ही दी है हमें ज़िन्दगी
उसके करम से, हर वचन से
राहों पे तेरी गिरेगी रोशनी
सबको तू माफ़ कर, ईश्वर तेरा इंसाफ़ कर
उसपे तो हक बस ईश्वर का ही है
तू औरों से इस कदर मिल
जैसे तू चाहे वो तुझसे मिलें
कहे प्रभु , “तू ईमान ला
तो परबत भी तेरे हुकुम पे चलेगा
नेकी की राहों पे तू चल
ईश्वर रहेगा तेरे संग
वो तो है तेरे दिल में, हाँ
तू क्यूँ बाहर उसे ढूंढता?
नेकी की राहों पे तू चल
ईश्वर रहेगा तेरे संग




