रिपोर्टर — राजीव कुमार झा
पुलिस अधीक्षक और हेड क्वार्टर डीएसपी रश्मि ने प्रेस को किया संबोधित
बिहार पुलिस
पुलिस की जवाबदेही और पारदर्शिता
एन सी आर बी मोबाइल एप
नए आपराधिक कानून 2023
नागरिक केंद्रित कानून
नई प्रणाली में टेक्नोलॉजी पर जोर
महिलाएं और बच्चे
आपराधिक एवं दंड को नए तरीके से किया गया परिभाषित
त्वरित न्याय
आपराधिक न्याय प्रणाली क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में बदलाव
मधुबनी एस पी शुशील कुमार एवं मुख्यालय डी एस पी रश्मि ने प्रेस को संबोधित करते हुए बताया है कि भारतीय संसद से पारित तीन नए अपराधी कानून 1 जुलाई 2024 से लागू होने जा रहे हैं। जिसमें मानव अधिकारों व मूल्यों को केंद्र में रखा गया है। नए कानून में अब भारतीय दंड संहिता 1860 की जगह भारतीय न्याय संहिता 2023 दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम भी 1872 की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 लेगा ।इन कानून में दंड की जगह न्याय पर विशेष बल दिया गया है। उक्त बात की जानकारी देते पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार ने अपने कार्यालय कक्ष में कहा कि न्याय पर केंद्रित तीनों नए अपराधी कानून को राज्य में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए बिहार पुलिस पूरी तरह से तैयार है। राज्य के 25 हजार से भी अधिक पुलिस अधिकारियों कर्मियों के नए कानून में हुए बड़े बदलावों से जुड़ी ट्रेनिंग दी जा चुकी है। साथी आम लोगों को भी वीडियो ग्राफिक्स, इंफोग्राफिक एवं अन्य माध्यमों से नए कानून के प्रति लगातार जागरूक कर इसे जुड़ी भ्रांतियां को दूर किया जा रहा है। एसपी ने बताया कि एसपी ने बताया कि नए कानून में डिजिटल तौर पर एफआईआर,नोटिस,सामान ट्रायल रिकॉर्ड फॉरेंसिंक, केस डायरी एवं आदि को संग्रहित किया जाएगा।तलाशी और जब्ती के दौरान वीडियोग्राफी फोटोग्राफी के लिए बिहार पुलिस के सभी अनुसंधानकर्ताओं को लैपटॉप और मोबाइल उपलब्ध कराए जाएंगे प्रत्येक थानों का नए उपकरणों के साथ आधुनिकीकरण किया जा रहा है ।अब हर थाने में वर्क स्टेशन डाटा सेंटर तथा अनुसंधान हाल रिकॉर्ड रूम और पूछताछ कक्ष का जल्द ही निर्माण होगा।बढ़ते हुए साइबर अपराध पर नियंत्रण एवं डिजिटल सबूत के प्रबंध अनुसंधान एवं साइबर सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला बिहार पटना तथा बिहार पुलिस अकादमी राजगीर में स्थित क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला में साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला की एक-एक इकाई स्थापित की जा रही है। नागरिक और प्रीत की केंद्रित तीन नए अपराधी कानून व्यक्तिगत अभिव्यक्ति के स्वतंत्रता की गारंटी देता है। यह भारत द्वारा भारत के लिए और भारतीय संसद द्वारा बनाए गए कानूनी के अनुसार संचालित होगी एवं इन कानून में समानता और निष्पक्षता के साथ न्याय पर बल दिया गया है। जिससे व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ सभी के लिए तुरंत सुनिश्चित की जा सके।
नए आपराधिक कानून को नागरिक केंद्रित बनाने की दिशा में बड़ी पहल
पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार ने बताया कि नागरिक घटनास्थल या उस पर कहीं से भी एफआईआर दर्ज कर सकते हैं पीड़ित एफआईआर की एक निशुल्क प्रति प्राप्त करने के हकदार है। पुलिस द्वारा प्रीत को 90 दिनों के अंदर जांच की प्रगति के बारे में सूचित करना अनिवार्य है। महिला अपराध की स्थिति में 24 घंटे के अंदर प्रीता की समिति से उसकी मेडिकल जांच की जाएगी साथ ही 7 दिनों के अंदर चिकित्सक उसकी मेडिकल रिपोर्ट भेजेंगे। अभियोजन पक्ष की मदद के लिए नागरिक को खुद का कानूनी प्रतिनिधित्व करने का अधिकार है। बीएनएस की धारा 396 एवं 397 में पीड़ित को मुआवजे और मुफ्त इलाज का अधिकार दिया गया है।बीएनएस की धारा 398 के अंतर्गत गवाह संरक्षण योजना का प्रावधान है केस वापसी के पहले न्यायालय को पीड़ित की बात सुनने का अधिकार दिया गया है। कोर्ट में आवेदन करने पर प्रिटों को ऑर्डर की निशुल्क कॉपी प्राप्त करने का अधिकार मिला है।कानूनी पूछताछ और मुकदमे की कार्रवाई को इलेक्ट्रॉनिक रूप से आयोजित करने का प्रावधान है। कानून के तहत सेकेंडरी एजुकेशन का दायरा बढ़ा दिया गया है इसमें मौखिक एवं लिखित स्वीकारोक्ति की और दस्तावेज की जांच करने वाले कुशल व्यक्ति का साक्ष्य शामिल है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि महिलाएं और बच्चों के साथ होने वाले अपराध से निपटने के लिए ने अपराधी कानून में 37 धाराओं को शामिल किया गया है पीड़ित और अपराधी दोनों के संदर्भ में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को जेंडर न्यूट्रल बनाया गया है 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार करने पर दोषी को आजीवन कारावास या मृत्युदंड की सजा मिलेगी झूठे वादे या नकली पहचान के आधार पर यौन शोषण करना अब अपराधि कृत माना जाएगा चिकित्सकों के लिए 7 दिनों के अंदर बलात्कार प्रीति मेडिकल रिपोर्ट जांच अधिकारी के पास भेजना अनिवार्य होगा।
न्याय प्रणाली में टेक्नोलॉजी पर जोर
क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के सभी चरणों का डिजिटल रूपांतरण किया गया है जिसमें इ समन, ई नोटिस, इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज प्रस्तुत करना और ई ट्रायल शामिल है। एसपी ने बताया कि पीड़ित ई बयान दे सकते हैं। साथी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से गवाह अभियुक्त विशेषज्ञ को और पीड़ितों की उपस्थिति के लिए ई अप्रेंस
की शुरुआत की गई है।
दस्तावेजो की परिभाषा में सर्वर लोग, स्थान संबंधित साक्ष्य और डिजिटल वॉयस संदेश को शामिल किया गया है अब अदालतों में इलेक्ट्रॉनिक साक्षी को फिजिकल एविडेंस के बराबर माना जाएगा।
अपराध एवं दंड को नए तरीके से किया गया परिभाषित
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि छीना झपटी एक गंभीर और नॉन बेलेवल अपराध है। भारत की एकता,अखंडता,संप्रभुता، सुरक्षा आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने या किसी समूह में आतंक फैलाने के लिए किए गए कृतियों को आतंकवादी गतिविधि मानी जाएगी। राजद्रोह की जगह देशद्रोह शब्द इस्तेमाल किया गया है। जिसमें भारत की एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले अपराधी गतिविधि शामिल है। मॉब लीचिंग करने पर अब दोषियों को मृत्युदंड की सजा मिलेगी। नए कानून में संगठित अपराध को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
त्वरित न्याय
एक तय समय सीमा अंदर न्याय दिलाने के लिए बीएनएस में 45 धाराओ जोड़ा गया है। किसी भी मामले पर पहली सुनवाई शुरू होने के 60 दिनों के अंदर आरोप तय किए जाएंगे और आरोप तय होने के 90 दिन बाद घोषित अपराधियों की अनुपस्थिति में भी कानूनी कार्यवाही शुरू हो जाएगी। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि अभियोजन के लिए मंजूरी दस्तावेजों की आपूर्ति प्रतिबद्ध कार्यवाही डिस्चार्ज याचिका को दाखिल करना आरोप तय करना निर्णय की घोषणा और दया याचिकाओं को दाखिल करना निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करना अनिवार्य किया गया। आपराधिक कार्यवाही में कोर्ट को दो से अधिक स्थगन देने की अनुमति नहीं है समय जारी करने और उसकी तमिल करने तथा न्यायालय के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा।
आपराधिक न्याय प्रणाली (क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम) में बदलाव
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि मजिस्ट्रेट को 3 वर्ष तक के काराआवास की सजा वाले मामलों में समरी ट्रायल करने का अधिकार है। समय पर न्याय मामले पर पहली सुनवाई शुरू होने के 7 दिनों के अंदर।आरोप।तय होना चाहिए। किसी भी आपराधिक अदालत में मुकदमे के समापन के बाद निर्णय की घोषणा में 45 दिनों से अधिक समय नहीं लगेगा। अभियोजन निदेशालय राज्य में एक अभियोजन निदेशालय स्थापित होगा जिसके अंतर्गत प्रत्येक जिले में जिला अभियोजन निदेशालय होंगे। अभियोजन निदेशालय न्यायालय में मामलों की कारवाही के जल्द निपटारे और अपील फाइल करने पर अपनी राय देने के साथ-साथ उसे मॉनिटर करेंगे। सभी पूछताछ और परीक्षण इलेक्ट्रॉनिक मोड में भी आयोजित किया जा सकता है। बेचाराधीन कैदियों की रिहाई पहली बार अपराध करने वाले अपराधियों को रिहा किया जा सकता है यदि विचारधारीन कैदियों की हिरासत अवधि सजा की एक हिताई तक पहुंच जाती है।
पुलिस की जवाब देही और पारदर्शिता
कोई भी गिरफ्तारी ऐसे अपराध के मामले में जो 3 वर्ष से काम के कारावास से धन्य है। और ऐसा व्यक्ति जो गंभीर बीमारी से प्रीत है। या 60 वर्ष अधिक की आयु का है ऐसे अधिकारी जो पुलिस उप अधीक्षक से नीचे की पंक्ति का ना हो पूर्व अनुमति के बिना नहीं की जाएगी गिरफ्तारी तलाशी और जांच में पुलिस की जवाब देही बढ़ाने के लिए भी अधिक से अधिक धाराएं शामिल की गई है असंज्ञेय मामलों में दैनिक डायरी रिपोर्ट में मजिस्ट्रेट को 15 दिनों के अंतराल पर भेजी जाएगी।




