प्रस्तुति अनमोल कुमार
शतावर्याश्च तत्समम्।। अजाक्षीरं गडूच्याश्च आमलक्या रसं तथा।*प्रस्थं प्रस्थं समाहृत्य सर्वैरेभिर्घृतं पचेत्।।कल्कैः कणासिता द्राक्षा त्रिफला नीलमुत्पलम्। मधुकां क्षीरकाकोली मधुपर्णी निदिग्धिका।। *क्र.सं.घटक द्रव्यप्रयोज्यांगअनुपात*
1गो घृत बिलोने का गाय का घी)750 ग्रा.
2त्रिफला क्वाथ750 मि.ली.
3भृंगराज स्वरस 750 मि.ली.4वासा स्वरस 750 मि.ली.
5गुडूची क्वाथ काण्ड750 मि.ली.
6शतावरी क्वाथ मूल750 मि.ली.
7आमला क्वाथ 750 मि.ली.
8बकरी दूध 750 मि.ली.
9पीपर फल17 ग्रा.
10चीनी (Sugar)17 ग्रा.
11द्राक्षा शुष्क फल17 ग्रा.
12आमला फलमज्जा17 ग्रा.
13हरीतकी फलमज्जा17 ग्रा.
14बहेड़ा फलमज्जा17 ग्रा.
15नीलकमल 17 ग्रा.
16मुलहठी मूल17 ग्रा.
17क्षीरकाकोली 17.ग्रा.
सेवन मात्रा
6-12 ग्रा.
अनुपान– गर्म गाय के दूध, या गर्म पानी के साथ
गुण और उपयोग– त्रिफला को नेत्रों के लिए सर्वोत्तम माना गया है। अतः यह घृत नेत्रों के लिए बहुत लाभदायक है। रतौंधी, तिमिर, आँखों में दर्द होना, आँखों से कम दिखाई पड़ना, रक्तदुष्टि, रक्तस्राव पेट की कब्ज, शरीर में चंमडी संबंधित रोग इन सब में इस घृत का प्रयोग बहुत लाभदायक है।
यदि पित्तवृद्धि के कारण आँखे लाल हो, आँखों में सूजन हो, रोशनी में आँखें खोलने में कठिनाई हो तो इस घृत को मिश्री मिलाकर सेवन और त्रिफला के जल से प्रातकाल आँखों को धोएं, इससे आँखों की समस्याएँ दूर होकर आँखों की ज्योति बढ़ती है।
जिन लोगों को नेत्र रोग की समस्या नियमित रूप से बनी रहती है उन्हें इस घृत का सेवन प्रतिदिन करना चाहिए। इससे रोग दूर होकर आँखे स्वस्थ बनी रहती है तथा शरीर की भी पुष्टि होती है। इसे बनाने के लिए शुक्ल पक्ष के मंगलवार या बृहस्पतिवार कोई योग बनाकर कार्य करना चाहिए जिससे इसकी शक्ति अति शीघ्र हमें नजर आते हैं। BABA G HERBAL त्रिफला घृत का ऑर्डर आप वेबसाइट पर जाकर दे सकते हैं जहां आपको अन्य और कई प्रकार की जानकारियां नजर आऐगी




