रिपोर्ट- अरविंद कुमार!
, समस्तीपुर : शहर के कैलाश होटल में रविवार को न्यास बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष व पूर्व आईपीएस किशोर कुणाल ने समस्तीपुर सीट पर लोजपा से चुनाव लड़ रही अपनी पुत्रवधू के समर्थन करने को लेकर एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया। इसमें उन्होंने कहा कि मैं हमेशा ही राजनीति निरपेक्ष व्यक्ति रहा हूँ, फिर भी मैं इस चुनाव में उम्मीदवार शांभवी का समर्थन कर रहा हूं। इसका कारण है कि समस्तीपुर इस बार इतिहास रचने के कगार पर हैं। यहां कि उम्मीदवार शाम्भवी देश की सबसे कम उम्र की उम्मीदवार हैं और जीतने पर देश की सबसे कम उम्र की सांसद होंगी। वह सबसे अधिक वोटों से विजय होती हैं, तो समस्तीपुर का नाम इतिहास में अमिट हो जायेगा। मैं उन्हें अधिकतम वोटों से जिताने की अपील करने आया हूँ। वह हर तरह से योग्य उम्मीदवार हैं। वे भले ही एक मंत्री की सुपुत्री हों, किन्तु योग्यता, अर्हता में ये देश की सबसे दो सुशिक्षित उम्मीदवारों में एक हैं। उन्होंने देश की सवर्वोत्तम शिक्षण संस्थाओं से शिक्षा पायी हैं। दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक की परीक्षा पास की है, और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स से मास्टर की डिग्ग्री प्राप्त की है। स्कूल की शिक्षा थी पटना के सर्वश्रेष्ठ गर्ल्स स्कूल नोट्टे डैम से पायी हैं। योग्यता, काबलियत की शख्सियत की धनी हैं। अपनी शिक्षा-दीक्षा एवं योग्यता अर्हता के आधार पर वह जीत के बाद देश की उदीयमान दलित नेता के रूप में उभड़ेंगी और समस्तीपुर का नाम रौशन करेंगी। वे समस्तीपुर के समस्त हित के लिए सतत प्रयासरत रहेंगी। मैं इतना विश्वास दिलाता हूँ कि वे स्थायी रूप से समस्तीपुर के सुख-दुःख में साथ देंगी और जनता की समस्याओं को सुलझाने में सक्रिय भूमिका निभायेंगी। कुछ लोग बाहरी और स्थानीय होने का मुद्दा उठा रहे हैं। वह लोग वही है जिनकी पार्टी के प्रान्तीय अध्यक्ष अपने पुत्र को दूर दराज महाराज गंज से लड़ाते हैं और इसी पार्टी के राष्ट्रीय नेता सुदूर केरला से चुनाव लड़ते हैं, तब बाहरी और स्थानीय का मुद्दा नहीं बनता। उन्होंने उनके विवाह को लेकर कहा कि कुछ लोग अन्तरजातीय विवाह को लेकर मुद्दा उठाते हैं। जो लोग एक ओर जमुई संसदीय क्षेत्र में अन्तरजातीय विवाह वाली सम्भ्रान्त महिला उम्मीदवार की सराहना करते हैं और सराहना जरूर की जानी चाहिए, यहाँ यह मुद्दा उठाते हैं। अतः यह मुद्दा उठाना बिल्कुल बेईमानी है। यह देश कानून संविधान से चलता है और जो प्रावधान है, वह मान्य होना चाहिए। शांभवी पूरी निष्ठा, शुचिता एवं तत्परता से जनता की सेवा करेंगी। अपनी सांसद निधि-राशि से एक-एक पाई का उपयोग पूरी ईमानदारी के साथ जन-कल्याण में करेंगी। इसके अलावे वे समस्तीपुर क्षेत्र की सारी समस्याओं को पुरजोर तरीके से उजागर करेंगी और समाधान के लिए समस्तीपुर से पटना और दिल्ली तक दौड़ लगायेंगी और जब तक सफलता नहीं मिल जाती, तब तक शान्त नहीं बैठेगी।समस्तीपुर की जनता की स्वास्थ्य सेवाओं के समाधान के लिए ‘श्री कर्पूरी स्मृति चिकित्सा ट्रस्ट’ बनाकर अपने संसदीय वेतन के विपुलांश से एक निधि की स्थापना करेंगी जिससे गरीब मरीजों का इलाज हो सके। गरीब लोंगो के भोजन के लिए मुफ्त राशन सरकार मुहैया करा रही है और आयुष्मान कार्ड धारकों को प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री कोष से उपचार के लिए सहायता मिल रही है। बचे हुए लोगों के इलाज के लिए श्री कर्पूरी स्मृति चिकित्सा ट्रस्ट से निधि दी जायेगी। इसके लिए हर विधानसभा क्षेत्र में एम्बुलेंस की व्यवस्था होगी और मरीजों के इलाज के लिए जरूरी कदम उठाये जायेंगे। उन्होंने विरोधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब बीके रवि प्रतिपक्ष के प्रत्याशी होने वाले थे, तब मैं नहीं आनेवाला था क्योंकि वे तमिलनाडु के डी.जी.पी. थे; योग्य उम्मीदवार और हमारी पुलिस बिरादरी के थे। किन्तु अब जब उनको आश्वासन के बावजूद टिकट से वंचित कर दिया गया, तब नव प्रतिपक्ष-प्रत्याशी को देखने के बाद मुझे शाम्भवी की योग्यता एवं श्रेष्ठता की घोषणा करने में कोई संकोच नहीं हुआ। अतः शाम्भवी के समर्थन में आया हूँ। यदि मैं नहीं आता, तो यह दुष्प्रचार किया जाता कि मैं सायण-शाम्भवी की शादी के विरूद्ध था और उसकी उम्मीदवारी का विरोधी भी। अतः मेरा आना आवश्यक था। मैंने पाया है कि शाम्भवी सुशिक्षित होने के साथ संस्कारी भी है, अतः वह प्रतिपक्ष के बारे में भी बहुत संयम भाषा में मर्यादापूर्वक बोल रही हैं।




