मिथिला का लोक पर्व जुरशीतल में पारंपरिक हथियारों के साथ सदियों से खेला जाता है खुनी खेल!

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रिपोर्टर — राजीव कुमार झा

इस खेल में पत्थर बाजी,
भाला, बरछी, जहरीला तीर, गुलेल जैसे अन्य खतरनाक हथियार भी किया जाता है इस्तेमाल

मधुबनी जिला मुख्यालय से सटे रहिका ,राजनगर , कलुआही क्षेत्र के मध्य नाजिरपुर, डोकहर , शिविपट्टी, बेलहवार, बेलाही, अमादा और हरिनगर के मध्य मे जुड़शीतल के दिन सौ साल से भी अधिक दिनों से चले आ रहे खुनी खेल आज भी जिवंत है। इस तरह के पुरखों द्वारा स्थापित परम्परा को आज भी यहां के नए पीढ़ी निभाते आ रहे हैं। सदिस्यों से चले आ रहे अंधबिस्वास के इस खेल को जान जोखिम में डाल कर लोगोंने यहां खूनी खेल के परंपरा को अभी तक निर्वाहन करते आ रहे हैं।प्रशासन के द्वारा लाख चेतावनी और प्रयासों के बाबजूद भी इस खेल को रोक पाने में सफल नहीं हो पा रही है। खेल स्थल से पूरब दिशा में शिविपट्टी, बेलहवार्, रशीदपुर, पहिहारपुर , बल्हा सहीत राजनगर और खजौली थाना क्षेत्र के दर्जनों गांव के लोग एक तरफ युद्ध में एक साथ भाग लेते हैं। वही पश्चिम दिशा मे बहरवन- बेलाही, नाजीरपुर, कनैल सहित कलुआही, रहिका और बेनीपट्टी थाना क्षेत्र के दर्जनों गांव के लोग यूद्ध के मैदान में उतर कर आज भी परंपरागत यूद्ध लोड़ा करते हैं। जिसे देख कर लगता है मानो ये महाभारत का रण मैदान हो। इसे खुनी लड़ाई भी कही जाती है। इस लड़ाई बाली खेल का एक विशेषता यह है कि इस लड़ाई मे खून खराबे होने के बाबजूद भी आज के बाद लड़ाई को लेकर भविष्य में किसी को भी कोई रंजिश नहीं रहता है। जैसे कि लोगों का कहना है कि पूर्व से इस रिवाज को यहां के लोग मनाते आ रहे हैं ।
इस खेल मे बसिया भात और बड़ी खा कर लोग मार करने जाते है । पहिले यह खेल लगभग एक महीना तक लागातार चलता था पंरतु कुछ वर्षों से लोगों को रुचि कम होंने के कारण आब दो से तीन दिन तक मात्र यह लड़ाई होती है। लड़ाई को रोकने के लिए चार थानो कि पुलिस सहित भारी संख्या मे पुलिस के जवानों को लगे रहने के बाबजूद भी इसे रोक पाने में प्रशासन असफल हो मुक दर्शक बने रहते हैं । इस खेल मे पूर्व मे कुछ लोगों की मृत्यु भी हो चुकी है और कई लोग अपंग भी हो चुके हैं । समाचार लिखे जाने तक इस वर्ष कि युध्द में कोई खास घटना घटने की सूचना नहीं है। उक्त सूचना कलुआही प्रखण्ड क्षेत्र के मधेपुर पंचायत के पूर्व मुखिया अजय कुमार झा
नाजिरपुर के पूर्व मुखिया मोहम्मद साबिर, पंडित उदय चंद्र पांडे, पंडित विष्णु देव पांडे और जय श्री दिल ने दी है। वहीं दूसरी तरफ उसी दिन
कलुआही थाना क्षेत्र अन्तर्गत बेलाही ग्राम में अभी भी जूर शीतल के मौके पर पूर्व से आ रहे परंपरा को धरोहर के रूप में मनाते हैं। बता दें कि जुर शीतल के धुरखेल के दिन पहलवानी का जोर आजमाइश होता आ रहा है। इस मौके पर ध्वजा गार कर पूजा पाठ कर मिट्टी के अखाड़ा बना कर ढोल बाजे के साथ स्थानीय पहलवानों की जोड़ी मिलाकर अपने शक्ति का प्रदर्शन करते हैं। इस कुस्ती के बाद लोग अखाड़े की मिट्टी का टीका लगाकर अपने शरीर के स्वस्थ होने का कामना करते हैं। वहीं सदर अनुमंडल पदाधिकारी अश्वनी कुमार ने बताया कि इस मौके पर पुलिस बल की तैनाती की गई है किसी भी तरह के अनहोनी की घटना ना घटे। प्रशासन मुस्तैद और एलर्ट है।

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