प्रो.परशुराम सिंह का निधन साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति -प्रो.बलिराज ठाकुर

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रिपोर्ट- आशुतोष पांडेय

महाराजा कॉलेज के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष और “ईक्षा “के संपादक डॉ.परशुराम सिंह के निधन पर भोजपुर ज़िला हिंदी साहित्य सम्मेलन और स्नातकोत्तर भोजपुरी विभाग,वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में भोजपुरी विभाग के सभागार में आयोजित शोक सभा की अध्यक्षता सम्मेलन के अध्यक्ष प्रो.बलिराज ठाकुर ने की।शोक-संवेदना व्यक्त करते हुए प्रो.ठाकुर ने कहा कि ईमानदारी,वचन का पालन और उदारता उनकी जीवन शैली की विशेषताएँ थी।उनका निधन इस जनपद के लिए एक बड़ी दुर्घटना है।कवि समीक्षक जितेन्द्र कुमार ने कहा कि परशुराम बाबू शान्तिप्रिय व्यक्ति थे जो अध्ययन और अध्यापन में व्यस्त रहते थे।स्पष्ट बोलने में वे हिचकिचाते नहीं थे।वी के एस यू के हिंदी और भोजपुरी विभागाध्यक्ष डॉ.दिवाकर पांडेय ने कहा कि वे अपने सिद्धांत पर अडिग रहते थें।उनके द्वारा संपादित ईक्षा पत्रिका से उनकी समीक्षा -शैली का पता चलता है ।डॉ.नीरज कुमार ने कहा कि परशुराम बाबू हिंदी साहित्य के अध्येता तो थे ही हिन्दी भाषा को उचित स्थान दिलाने के पक्षधर भी थे।शोकसभा में शोकोद्गार व्यक्त करने वालों में हिंदी विभाग के डॉ.नवनीत कुमार राय,संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ.श्रीप्रकाश राय,डॉ.मुकेश कुमार राम,डॉ.ओम प्रकाश दुबे,डॉ.सत्यनारायण उपाध्याय,शिवदास सिंह ,प्रो.हरेराम ठाकुर,प्रो.श्रीभगवान पांडेय सहित कई साहित्य प्रेमियों शोक -संवेदना व्यक्त की ।शोक प्रस्ताव सम्मेलन के प्रधानमंत्री डॉ.नंदजी दूबे ने पढ़ते हुए अपनी संवेदना व्यक्त की ।अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने और उनके परिजनों को धैर्य धारण की शक्ति देने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई ।

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