निभाष मोदी!

पूर्वी बिहार के सबसे बड़े अस्पताल जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल मायागंज, के चिकित्सकों और अस्पताल प्रबंधन पर एक बार फिर इलाज में लापरवाही से दस माह की बच्ची की मौत का आरोप लगाते हुए परिजनों ने जमकर बवाल काटा, और आक्रोशित परिजनों ने पीजी शिशु रोग विभाग में तैनात डॉ प्रभात का कॉलर पकड़कर अभद्र व्यवहार भी किया, जिसके बाद आक्रोशित परिजन अस्पताल अधीक्षक डॉ असीम कुमार दास के चेंबर में पहुंचे और इंसाफ की गुहार लगाई ।

मामले की जानकारी मिलते ही शिशु रोग विभाग के एचओडी प्रोफेसर डॉक्टर आर के सिन्हा अस्पताल पहुंचे और मामले की पूरी जानकारी हासिल कर अस्पताल सुपरिटेंडेंट को इस से अवगत कराते हुए बरारी थाना पुलिस को हंगामा किए जाने की सूचना दी। जिसके बाद मौके पर पहुंची बरारी थाना पुलिस ने एक घंटे तक चले हंगामे को समझा-बुझाकर शांत कराया। दरअसल बांका जिले के रजौन निवासी राहुल सिंह कि दस माह की बेटी हिमांशी को गुरुवार देर रात गंभीर हालत में इलाज के लिए मायागंज के पीजी शिशु रोग विभाग के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि बच्चे की स्थिति गंभीर थी और लगातार हमलोग डॉक्टर को खोजते रहे लेकिन कोई भी चिकित्सक बच्ची को देखने नहीं पहुंचा और एक नर्स के द्वारा हिमांशी को एक इंजेक्शन दिया गया। उसके काफी देर बाद डॉक्टर आए और सुबह 11 बजे तक कोई भी डॉक्टर बच्ची को देखने नहीं आया , जिसके बाद धीरे-धीरे उसकी हालत चिंताजनक होने लगी, और उसके बाद चिकित्सकों की लापरवाही के कारण उसकी जान चली गई।इस दौरान मृतका की बुआ रितिका सिंह ने शिशु रोग विभाग के इमरजेंसी वार्ड में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों पर ऑक्सीजन लेवल बढ़ाए जाने के कारण हिमांशी की मौत होने का सनसनीखेज आरोप भी लगाया है, बहरहाल मामला जो भी हो लेकिन पूर्वी बिहार के सबसे बड़े अस्पताल प्रबंधन पर लगने वाले आरोपों की जिला प्रशासन अपने स्तर से जांच कराएं और लापरवाह अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई करे।




