बेगूसराय – तुलसीदास जयंती पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन!

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नेहा कुमारी की रिपोर्ट

बेगूसराय जिले के बखरी प्रखण्ड में साहित्यिक संस्था श्रीविश्वबंधु पुस्तकालय में रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास की जयंती समारोह पूर्वक मनायी गयी। मौके पर कक्षा प्रथम से लेकर चतुर्थ के बच्चों के बीच मानस की चौपाइयों का सस्वर पाठ,पंचम से अष्टम के छात्र छात्राओं के लिए मानस में वर्णित भ्रातृत्व प्रेम, नवीं से दसवीं के छात्र छात्र-छात्राओं के बीच वर्तमान समय में रामचरितमानस की प्रासंगिकता तथा महाविद्यालय स्तरीय छात्र-छात्राओं के बीच मानस की सीता और आज की नारी विषयक भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिले के लब्ध प्रतिष्ठित कवि अशांत भोला ने कहा कि रामचरितमानस साहित्य की गंगोत्री है। भक्ति भाव की अंतःसलिला मानस में प्रवाहित होती है। आज की युवा पीढ़ी अगर मानस की कुछ पंक्तियां रोज पढकर भी आत्मसात कर ले,तो समाज का कल्याण हो जायेगा। कार्यक्रम में विषय प्रवेश करते हुए पुस्तकालय के पूर्व अध्यक्ष व निवर्तमान नगर पार्षद सिधेश आर्य ने कहा कि तुलसीदास का रामचरितमानस न सिर्फ साहित्य की धरोहर है,अपितु भारत के राष्ट्रीय समाज का पथ प्रदर्शक भी है। तुलसी के राम मर्यादा पुरुषोत्तम होने के साथ ही राष्ट्र पुरूष भी हैं। उन्होंने रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग भारत सरकार से की। कवि प्रफुल्ल मिश्रा ने कहां की श्रीविश्वबंधु पुस्तकालय में बीते सात दशकों से तुलसी जयंती समारोह की स्थापित परम्परा इसके साहित्यिक रूप से सजगता का प्रमाण है। संरक्षण समिति के संयोजक राजेश अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान समय संक्रमण का है। आज की युवा पीढ़ी भटकाव का शिकार है। ऐसे में रामचरितमानस उनके लिए रोशनी की किरण बन सकती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता पुस्तकालय के उपाध्यक्ष जयशंकर जायसवाल तथा संचालन सह सचिव प्रिंस सिंह परमार ने किया। मौके पर सचिव पवन कुमार सुमन, प्रतिनिधि संतोष भारती गुड्डू,कार्यसमिति सदस्य मणीश कुमार,कुंदन केसरी, सचिन केसरी, अभाविप के नगर मंत्री अनुभव आनंद,शिवम जालान, रामनंदन अज्ञानी,कल्याणी केसरी, अतिशा,वैष्णवी,वैद्यनाथ केसरी,रूद्रांश आदि मौजूद थे। इससे पूर्व, कार्यक्रम के शुरुआत में आगत अतिथियों ने तुलसीदास जी के चित्र व उनकी रचना रामचरितमानस पर पुष्पांजलि अर्पित कर समारोह की शुरुआत की। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें आगंतुक कवियों ने अपनी कविताओं का पाठ किया।

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