रिपोर्ट – संतोष तिवारी
बिहार/मुज़फ़्फ़रपुर
आज अमर शहीद खुदी राम बोस के फांसी स्थल पर मुज़फ़्फ़रपुर के आईजी पंकज सिन्हा , जिलाधिकारी प्रणव कुमार , खुदीराम बोस के गाँव से आये जथ्था और मुज़फ़्फ़रपुर के जनप्रतिनिधियों के साथ अन्य लोगों ने खुदीराम बोस जेल के अंदर उनके फांसी स्थल पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गयी , 11 अगस्त 1908 की सुबह खुदीराम बोस को फांसी दी जानी थी। उस काली भोर से चंद घंटे पहले की रात मुजफ्फरपुर सेंट्रल जेल में बंद 18 वर्षीय क्रांतिकारी खुदीराम ने कागज-कलम की मांग की, मगर जेल वालों ने इनकार कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने वहां रखे कोयले का टुकड़ा उठाया और जेल की दीवारों पर लिखा- एक बार विदाई देऊ मां घूरे आसी; हंसी-हंसी पोरबेन फांसी मा देखबेन जोगोत वासी… जब उन्हें 11 अगस्त 1908 की सुबह सेल से निकालकर फांसी के तख्त की ओर ले जाया जा रहा था, तब उनके होठों पर भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे के साथ-साथ उनका स्वरचित यह गीत- एक बार विदाई देऊ मां घरे असी अर्थात हे भारत माता मुझे एक बार विदा दो मैं फिर से तुम्हारी गोद में जन्म लूंगा। मैं मुस्कुराते हुए फांसी के क्रांतिकारी अमर शहीद खुदीराम
बोस, जिन्होंने सजा सुना रहे जज की आंखों में आंखें डालकर कहा था, मैं आपको भी बम बना सिखा सकता हूं। खुदीराम को जब फांसी के फंदे से लटकाने के लिए तख्त पर खड़ा किया गया, तब सरकारी महकमा के पदाधिकारी के साथ-साथ खुदीराम बोस के वकील कालिका रंजन घोष वहां मौजूद थे। आज उनके फांसी स्थल पर मुज़फ़्फ़रपुर के आईजी पंकज सिन्हा , जिलाधिकारी प्रणव कुमार , खुदीराम बोस के गाँव से आये जथ्था और मुज़फ़्फ़रपुर के जनप्रतिनिधियों के साथ अन्य लोगों ने जेल के अंदर उनके फांसी स्थल पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गयी ,
बाइट :- पंकज कुमार सिन्हा IG
बाइट:- प्रणव कुमार जिलाधिकारी मुज़फ़्फ़रपुर




