दुबई के वर्ल्ड आर्ट फेयर में राजीव का परचम, दुनिया भर की प्रदर्शनी के बीच कोसी पेंटिंग मचा रही धमाल

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आकाश कुमार

एक्रिलिक पेंटिंग में लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर चित्रकार राजीव राज की पेंटिंग अब देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी खूब पसंद की जा रही है। 9 – 12 मार्च तक दुबई ट्रेड फेयर के वर्ल्ड आर्ट दुबई में लगाए गए आर्ट फेयर में भारतीय चित्रकार राजीव राज की पेंटिंग का परचम लहरा रहा है। वर्ल्ड आर्ट दुबई में चित्रकार राजीव राज की कुल नौ पेंटिंग लगाई गई है। कोसी पेंटिंग आर्ट फेयर में विश्व भर की पेंटिंग के बीच एक अलग छाप छोड़ रही है।

जहां अंतरराष्ट्रीय चित्रकारों ने अपने चित्रों में समकालीन और आधुनिक शैली का प्रयोग किया है तो वहीं कोसी माटी के चित्रकार राजीव राज ने अपने कोसी पेंटिंग शैली प्रदर्शित कर देश ही नहीं बल्कि सात समंदर पार दुबई में बिहारी चित्रकार और कोसी पेंटिंग का परचम लहराया है। इस प्रदर्शनी के प्रायोजक एवम सेल्स रिप्रेजेंटेटिव श्रीमती अंजली भगत ने बताया कि राजीव राज की पेंटिंग प्रकृति व सौंदर्य विषय पर आधारित पेंटिंग है और सबों से हट कर दिखती है यहां के लोगों को इनकी पेंटिंग खूब आकर्षित कर रही है। इस पेंटिंग में प्राकृतिक सौंदर्य विषय पर कोसी नदी की सौंदर्य एवं संस्कृति की झलक दिखती है. 2017 में जापान के टोक्यो में इंटरनेशनल आर्ट फेयर में चित्रकार राजीव राज की कोसी पेंटिंग शैली पर आधारित कुल बारह चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई थी। राजीव राज विश्व की सबसे बड़ी अटल बिहारी वाजपेई जी की पेंटिंग लगातार 31 घंटे में बनाकर विश्व रिकॉर्ड कायम किया था जिसके तहत उन्हें लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ,इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड ,इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड से सम्मानित किया गया। 2020 ई में एक बार फिर बिहार का सर्वश्रेष्ठ कला पुरस्कार “राधा मोहन पुरस्कार ” से बिहार सरकार द्वारा चित्रकार राजीव राज को सम्मानित किया गया है।

कोसी पेंटिंग, कोसी नदी के पृष्ट भूमि पर केंद्रित कृति है। नदी के सौंदर्य एवम संस्कृति को इन चित्रों में पिरोया गया है। इस पेंटिंग की खास बात यह है कि प्राकृतिक सौंदर्य विषय पर आधारित कोसी शैली की पेंटिंग में कोसी नदी की सौंदर्य एवम संस्कृति की झलक दिखती है।बिहार के विश्व स्तरीय चित्रकला मधुबनी पेंटिंग से प्रेरित यह पेंटिंग है। कोसी पेंटिंग में चटकीले रंगों एवं सूक्ष्म रेखाओं के अलावा डॉट का भी इस्तमाल किया जाता है। पेंटिंग के चारों ओर बॉर्डर को भी अलंकृत किया जाता है जो इस पेंटिंग को और खूबसूरती प्रदान करती है।

कोसी माटी के चित्रकार राजीव राज हमेशा अपनी कलाकृति में कोसी के पृष्टभूमि को केंद्र में रख कर चित्रकारी करते हैं!कोसी नदी के उद्गम से लेकर संगम तक की पूरी धर्म ग्रंथ कथाओं को उन्होंने कैनवास में रूप दिया था।कोसी नदी की त्रासदी पर बनाई गई इनकी उत्कृष्ट कलाकृति से चित्रकार राजीव चर्चा में आए थे! 2012 ई में पहली बार राजीव राज को स्विट्जरलैंड के बेसल शहर में अंतराष्ट्रीय स्तर की पेंटिंग प्रदर्शनी में भाग लेने का मौका मिला था जिसमे राजीव राज अपनी कोशी शैली में कुल बारह पेंटिंग की प्रर्दशनी लगा कर पूर्णिया ही नहीं बिहार को गौरवांवित किया।

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