रिपोर्ट- अमित कुमार!
उपेंद्र कुशवाहा
जो हिस्सा कभी लालू जी ने नीतीश जी को नहीं दिया था और एक रैली में जिस हिस्सेदारी की बाद उन्होंने लालू से की थी वही हिस्सेदारी आज उपेंद्र कुशवाहा नीतीश कुमार से मांग रहे हैं
उपेंद्र कुशवाहा को अभी भी नीतीश कुमार से है उम्मीद
मुख्यमंत्री जी अपने से कुछ नहीं कर पा रहे हैं,कुढ़नी में जो रिजल्ट आया उसके बाद स्वयं सीएम ने कहा कि इनलोगो के कहने पर ही उम्मीदवार बनाया और जब- जब गठबंधन बदला तब तब उन्होंने कहा कि इंलोगो के बोलने पर गठबंधन बदला
भोजपुर में हुए उपेंद्र कुशवाहा पर हमले पर कुशवाहा ने कहा कि वहां के एसडीपीओ और एसडीओ ने प्रारंभिक जांच में कहां हैं कि मेरे ऊपर कोई हमला नहीं हुआ है
चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी स्वयं इस मामले की जांच करे
संसदीय बोर्ड की जिम्मेदारी देकर, मेरे हाथ में झुनझुना थमाया गया
पार्टी में जो भी मंत्री है वो लोग अपने क्षेत्रों में सीमित है,ऐसा कोई नेता नहीं है जो नेतृत्व कर सके
ऐसे कार्यकर्ता जो अतिपिछड़ा से आता हो और पार्टी के लिए समर्पित हो और नेता हो लीडर हो उसे राज्यसभा भेजा जाए
अतिपिछड़ा समुदाय में पार्टी के प्रति जो समर्पण था वो अब घी रहा हैं
सीएम ने कहा कि कुशवाहा जी आए तो हमने इज्जत दी और उनसे बहुत सनेह करते हैं
कई बार कहा गया कि संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष जब बनाया गया तो मुझे लगता था कि मुझे संसदीय बोर्ड का कार्य निर्वहन करने का मौका मिलेगा,लेकिन बाद में पता चला कि मेरे हाथ में एक झुनझुना थमाया गया था
पार्टी के संविधान संशोधन में स्पष्ट लिखा था कि संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष सदस्यों का मनोनय नही कर सकते
बिना अधिकार दिए मुझे संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया
संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष के नाते किसी भी चुनाव में मुझसे कुछ नहीं पूछा गया
संसदीय बोर्ड के नाते मुझसे कभी ये नही पूछा गया की किसको उम्मीदवार बनाया जाए
बल्कि मैं कई दफा मुख्यमंत्री जी और राष्ट्रीय अध्यक्ष जी से मुलाकात कर उम्मीदवारों के चयन पर बात की परंतु उन्हें3 मेरी बातो को तवज्जो नहीं दी
जब मेरी सुझाव की कोई वैल्यू नहीं है तो संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाना झुनझुना नहीं है तो क्या है
राज्यसभा और केंद्रीय मंत्री का पद छोड़ने में मुझे कभी मलाल नहीं हुआ तो ये एमएलसी और संसदीय बोर्ड का पद छोड़ने में कितना समय लगेगा,मुख्यमंत्री जी जब चाहे ये पद ले ले
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