BNMU प्रशासन ने मनमानी बंद नहीं किया तो होगा आंदोलन!

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मानस चंद्र सेतु , मधेपुरा

बीएनएमयू मे कोर्ट के फैसले ताक पर तो कहीं सिंडिकेट की सहमति बिना हो रहे ताबड़तोड़ निर्णय

बीएनएमयू में प्रशासनिक व्यवस्था की मनमानी चरम पर,गर यही रहे हालात तो होंगे जन आंदोलन

हालिया कुछ दिनों के अंदर ही बीएन मंडल विश्वविद्यालय में कई अजब गजब फैसले लिए जा रहे हैं जिससे नियम कानून व इसके पालन पर सवाल खड़े होने लगे हैं।वाम छात्र संगठन एआईएसएफ बीएनएमयू प्रभारी हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने कुलानुशासक व कुलसचिव को पत्र लिखकर वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।लिखे पत्र में राठौर ने कहा कि सिंडिकेट सदस्यों द्वारा बिना उच्च सदन के बैठक व सहमति के कमिटी गठन व निर्णय की शिकायत अचंभित करने वाला है।बिना सिंडिकेट व सीनेट सहमति के लाखों के गोलमाल वाला दीक्षांत समारोह आयोजन विवाद का चर्चा अभी खत्म ही नहीं हुआ कि सिंडिकेट की बैठक बुलाए बिना बीएनएमयू की आंतरिक कमिटियों को भंग कर नए सिरे से गठन ही नहीं किया गया बल्कि आनन फानन में नियम परिनीयम के विपरित मनमाफिक निर्णय लिए जा रहे हैं। कमिटी में सिंडिकेट द्वारा नॉमिनेट कॉलम में पदाधिकारी सदस्यों का नाम सर्वाधिक आश्चर्यजनक बीएनएमयू की प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह है क्योंकि नीति नियम के जानकारों की माने तो इसमें चुनाव से आए अथवा सरकार व राजभवन द्वारा नॉमिनेट सदस्य का ही नाम आ सकता है।एआईएसएफ
प्रभारी राठौर ने कहा कई सदस्यों द्वारा महामहिम कुलाधिपति सह राज्यपाल को लिखे पत्र में इन बातों का शिकायत रूपी खुलासा आश्चर्यचकित करने के साथ साथ यह बताने वाला है कि बीएनएमयू में प्रशासनिक विधि व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है।बीएनएमयू अविलंब सिंडिकेट सदस्यों के शिकायत की हकीकत स्पष्ट करे।दूसरी तरफ राठौर ने बीएड प्रकरण में कोर्ट के फैसले के बाद भी दोषियों पर कारवाई में सुस्ती पर सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि क्या विश्वविद्यालय के पदाधिकारी अब सीनेट,सिंडिकेट के बाद माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की भी अवहेलना पर उतारू हो गए हैं।छात्रों के भविष्य से खेलने के बाद यह हरकत शर्मनाक है सिर्फ एक पदाधिकारी पर कारवाई के बाद शेष पर मौन सवालों के घेरे में है क्योंकि बीएनएमयू ने कोर्ट में खुद ही दोषी पदाधिकारियों को चिन्हित किया है और माननीय उच्च न्यायालय ने लगभग उन्ही पदाधिकारियों पर कारवाई की बात भी की है। राठौर ने कहा कि जिस महान हस्ती भूपेंद्र बाबू के नाम पर यह विश्वविद्यालय स्थापित है आज उनकी आत्मा भी रो रही होगी कि उनके परिसर में दोषी ठहराये पदाधिकारी दंडित होने के बजाय मज़े से अपने पद पर बने हुए हैं।वहीं राठौर ने कहा कि दुखद है कि बिना फॉर्म भराए परीक्षा,कोर्ट के निर्णय की अवहेलना,सीनेट,सिंडिकेट की उपेक्षा,बिना पद की जवाबदेही जैसे अनैतिक व अलोकतांत्रिक कार्य हो रहे हैं तब भी कुलपति मौन धारण किए हुए हैं।लिखे पत्र में राठौर ने कहा कि बीएनएमयू अविलंब सिंडिकेट के सम्बन्ध में सदस्यों की शिकयत व बीएड प्रकरण पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे अन्यथा विश्वविद्यालय आंदोलन का अखाड़ा बन जाएगा।

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