बहंगी में माता-पिता को तीर्थ करानेवाले चन्दन को पत्नी समेत श्रवण कुमार प्रथम पुरस्कार!

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रिपोर्ट – अमित कुमार

रामायण काल के श्रवण कुमार की तरह बहंगी में माता-पिता को तीर्थ करानेवाले चन्दन को पत्नी समेत श्रवण कुमार प्रथम पुरस्कार
महावीर मन्दिर ने माता-पिता की निःस्वार्थ शारीरिक सेवा करनेवाले 8 लोगों को दिया श्रवण कुमार पुरस्कार
अखाड़ा परिषद के महामंत्री और जूना अखाड़ा के महंथ हरि गिरि के हाथों मिला प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार राशि
माता-पिता को संसार में सबसे महत्वपूर्ण मानकर उनकी अनन्य शारीरिक सेवा करनेवाले 8 लोगों को महावीर मन्दिर की ओर से श्रवण कुमार पुरस्कार दिया गया।

शनिवार को महावीर मन्दिर प्रांगण में आचार्य किशोर कुणाल की उपस्थिति में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री और जूना अखाड़ा के अन्तरराष्ट्रीय संरक्षक महंथ हरि गिरि जी महाराज ने जब जहानाबाद जिले के चन्दन कुमार केसरी और उनकी पत्नी रानी देवी को प्रथम पुरस्कार दिया तो वहां उपस्थित लोग और भक्त भावविह्वल हो गये। रामायण काल के श्रवण कुमार की तरह इन्होंने बहंगी में अपने वृद्ध माता-पिता को बैठाकर और उन्हें अपने कंधे पर रख 100 किलोमीटर पैदल चलकर तीर्थ यात्रा करायी। वृद्धावस्था से लाचार अपने 72 वर्षीय पिता जगन्नाथ केसरी और 67 साल की माता मीना देवी की सावन में बाबा वैद्यनाथ के दर्शन की इच्छा की पूर्ति के लिए चन्दन और उसकी पत्नी कांवर की बनी बहंगी में दोनों को बैठाकर सुलतानगंज से देवघर तक ले गये और भगवान वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का दर्शन कराया। इसकी चर्चा अखबारों एवं मीडिया में खूब हुई थी। जहानाबाद जिले के घोसी थाने के केवाली वीरपुर गांव के रहनेवाले इस दम्पत्ति को 1,00,000/- (एक लाख) रुपये की राशि एवं प्रशस्ति पत्र से पुरस्कृत किया गया। द्वितीय पुरस्कार रोहतास जिले के विक्रमगंज निवासी अरूण कुमार सिंह को दिया गया जो अपने 90 वर्षीय वृद्ध पिताजी मुंशी सिंह की सेवा निःस्वार्थ भाव से करते आ रहे हैं। इन्हें 50,000/- (पचास हजार) रुपये की राशि एवं प्रशस्ति- पत्र से दिया गया। जबकि तृतीय पुरस्कार दो लोगों को दिया गया। इनमें एक पालीगंज, पटना के राजनन्दन सिंह हैं जो अपनी माताजी की सेवा निःस्वार्थ भाव से कर रहे हैं एवं दूसरे ननौरा दरभंगा के अशोक साहू हैं जो अपने वृद्ध लकवाग्रस्त पिता राधे साहू की सेवा निःस्वार्थ भाव से लगभग 15 वर्षों से करते आ रहे हैं। दोनों व्यक्तियों को अलग-अलग 25,000/- ( पच्चीस हजार) रुपये की राशि एवं प्रशस्ति पत्र से पुरस्कृत किया गया।
इसके अतिरिक्त प्रोत्साहन पुरस्कार चार व्यक्तियों को मिला। इनमें दो बहुएं हैं जिन्होंने अपनी सासू मां की निःस्वार्थ सेवा की। ये हैं- (1) रम्भा देवी, पति ललितेश्वर नारायण, निवासी- विक्रम, पटना जो अपने सासू माँ की विगत 6 वर्ष से निःस्वार्थ भाव से सेवा कर रही हैं। (2) मंजुषा देवी, पति वसावन प्रसाद, निवासी -विक्रम, पटना जो अपने लगवाग्रस्त सासू माँ की निःस्वार्थ भाव से सेवा कर रही हैं। इनके अलावा माता-पिता की अनन्य सेवा करनेवाले दो लोगों को प्रोत्साहन पुरस्कार दिया गया। ये हैं- संजय कुमार, पिता स्व. शिव शंकर प्रसाद, निवासी- मालगोदाम, नवादा जिन्होंने 11 वर्षों तक शरीर से विकलांग अपने पिता की सेवा निःस्वार्थ भाव से की थी और राजगीर प्रसाद, पिता स्व. शिवपति यादव, पता- दुल्हिन बाजार, पटना जिन्होंने अपने माता-पिता की सेवा निःस्वार्थ भाव से की थी। चारों व्यक्तियों को 10,000 /- (दस-दस हजार) रुपये की राशि एवं प्रशस्ति पत्र से पुरस्कृत गया।आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि बिहार-झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव विजय शंकर दूबे की अध्यक्षता में गठित चयन समिति की दिनांक 20-10-2022 को हुई बैठक में श्रवण कुमार पुरस्कारों के लिए योग्य व्यक्तियों का चयन किया गया था। चयन समिति की बैठक में लेफ्टिनेंट जनरल (अ० प्रा०) ए के चौधरी, पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर रास बिहारी सिंह एवं आचार्य किशोर कुणाल भी शामिल हुए थे। इस अवसर पर महंथ हरि गिरि जी महाराज ने पुरस्कृत पुत्रों एवं पुत्रवधुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन से समाज में सेवाभाव को प्रोत्साहन मिलता है। उन्होंने महावीर मन्दिर न्यास के इस अभियान को सराहनीय बताया। हनुमानजी के दो विग्रहों वाले पटना के प्रसिद्ध महावीर मन्दिर की न्यास समिति द्वारा शारीरिक एवं आर्थिक दृष्टि से कमजोर माता-पिता की सेवा करनेवाले पुत्रों एवं सास-श्वशुर की सेवा करनेवाली वधुओं के लिए वर्ष 2010 से श्रवण कुमार पुरस्कार दिए जा रहे हैं। आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि यह पुरस्कार ऐसे लोगों को दिया जाता है, जो स्वयं अपनी कमाई से आस्थापूर्वक अपने वृद्ध माता-पिता की शारीरिक रूप से सेवा-सुश्रूषा कर रहे हैं। इसके चयन में किसी धर्म या जाति का बन्धन नहीं है। किन्तु यह पुरस्कार उन धनकुबेरों एवं उन एनआरआई के लिए नहीं है, जो अपने माता-पिता के लिए रुपया भेजकर या अस्पताल / वृद्धाश्रमों में भर्ती कराकर अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लेते हैं। इस पुरस्कार के लिए कोई सरकारी पदाधिकारी, चिकित्सक, स्वयंसेवी संस्थाएँ, मुखिया, सरपंच या कोई जिम्मेदार व्यक्ति निःस्वार्थ सेवा सम्बन्धी विभिन्न साक्ष्यों को संलग्न करते हुए महावीर मन्दिर न्यास की चयन समिति को अनुशंसा कर सकते हैं।

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