लेप्रोसी को जड़ से मिटाने के लिए केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार भी लगातार प्रयासरत!

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कैमूर/भभुआ(ब्रजेश दुबे):

कुष्ठ रोग यानी लेप्रोसी को जड़ से मिटाने के लिए केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार भी लगातार प्रयासरत है। इसको लेकर समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं और लोगों को कुष्ठ रोग के प्रति जागरूक किया जाता है। हालांकि लोगों में अभी भी कुष्ठ रोग को लेकर भ्रांतियां फैली हुई है की कुष्ठ रोग छुआछूत की बीमारी है, जिसकी वजह से आज भी कुष्ठ रोग से पीड़ित लोग घृणा की दृष्टि से देखे जाते हैं। हालांकि धीरे-धीरे अब लोगों के मनसे यह धरना खत्म हो रही है। कुष्ठ रोग के शुरुआती लक्षण दिखने के बाद तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में संपर्क करें क्योंकि शुरुआती दौर में इलाज से कुष्ठ रोग ठीक हो सकते हैं। एसीएमओ सह जिला कुष्ठ रोग पदाधिकारी डॉ जे. एन. सिंह ने बताया कि कुष्ठ रोग छुआछूत की बीमारी नहीं है इसे छूने से नहीं फैलता है फिर भी एहतियात के तौर पर क्लोज कांटेक्ट वाले व्यक्तियों को सिंगल डोज रेफेमपीसीन (एडीडीआर) की एक डोज दी जाती है। इसमें सिर्फ घर के लोगो को ही ये डोज दी जाती है। क्योंकि क्लोज कॉन्टेक्ट में ज्यादातर घर के ही लोग आते है इसलिए सिर्फ उन्हें ही ये एक बार खुराक दी जाती है। कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों की पहचान करके उनकी इलाज की जाती है। डॉ. सिंह ने बताया कि इलाज के दौरान लेप्रोसी को रोका जा सकता है परंतु कभी-कभी किसी में डिफॉरमेटी रह जाता है यानी कि वह जड़ से खत्म नहीं हो पाता परंतु उसे रोका जा सकता है। कुष्ठ रोग की वजह से कुछ कुछ लोगों में दिव्यांगता आ जाती है। ऐसे में उनकी जांच कर ग्रेड 2 का सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है और उसे सामाजिक सुरक्षा कोषांग में भेज दिया जाता है। जहां से कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्ति को सरकार द्वारा प्रतिमा 1500 रुपए आजीवन पेंशन आर्थिक सहयोग के रूप में प्रदान की जाती है।

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