कैमूर/भभुआ(ब्रजेश दुबे):
सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग वर्ष 2025 तक राज्य सहित देश से यक्ष्मा उन्मूलन को लेकर संकल्पित है. वैश्विक रूप से डब्ल्यूएचओ एवं भारत सरकार ने जो लक्ष्य तय किया है, उसके मुताबिक टीबी मरीजों की कुल संख्या को 2030 तक 2015 के कुल मरीजों की संख्या के बीस फीसदी तक ले आना है. इससे अलग हटकर भारत सरकार ने अपने लिए यह समय सीमा 2025 तक तय किया है. टीबी मरीजों को चिह्नित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निजी क्लिनिक के संचालकों एवं सहयोगी संस्थाओं को भी यक्ष्मा मरीजों को चिह्नित करने का लक्ष्य रखा है. वहीं विभाग के निर्देश के अनुसार अब प्राइवेट क्लिनिक पर इलाजरत यक्ष्मा मरीजों का निश्चय पोर्टल पर निबंधन करना अनिवार्य कर दिया गया है. निक्षय पोर्टल पर एंट्री को लेकर प्राइवेट क्लिनिक के डॉक्टर को भी प्रत्येक मरीज के नोटिफिकेशन पर 500 रु. देने का प्रावधान है.
= राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, यक्ष्मा ने जारी किया पत्र
राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, यक्ष्मा डॉ. बाल कृष्ण मिश्र ने पत्र जारी कर संबंधित अधिकारीयों तथा सहयोगी संस्थाओं को निर्देश दिया है. जारी पत्र में बताया गया है कि केंद्रीय यक्ष्मा विभाग द्वारा वर्ष 2022 में राज्य में प्राइवेट सेक्टर का कुल नोटिफिकेशन का लक्ष्य 1,20,000 रखा गया है जबकि सितंबर 2022 तक राज्य में कुल प्राइवेट सेक्टर का नोटिफिकेशन 60,656 हुआ है एवं शेष 59,344 का नोटिफिकेशन दिसंबर तक पूरा करना है.
= जिले में लक्ष्य के सापेक्ष में 68% हुआ नोटिफिकेशन:
जारी पत्र से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले में प्राइवेट सेक्टर द्वारा वर्ष 2022 में 1200 नोटिफिकेशन का लक्ष्य रखा गया है जबकि सितंबर 2022 तक कुल 131 मरीजों का नोटिफिकेशन किया गया है जो लक्ष्य का 11% है. वर्ष के अंत तक जिले में प्राइवेट सेक्टर द्वारा अभी 1069 मरीजों का नोटिफिकेशन किया जाना शेष है.
= टीबी हो सकता है जानलेवा
यूं तो बीमारियां लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता के आधार पर शरीर पर असर दिखाती है। लेकिन, ज्यादातर बीमारियां अनदेखी के कारण भयानक रूप ले लेती हैं। इन्हीं बीमारियों में से एक है ट्यूबरक्लोसिस (टीबी)। जो हवा में तैरते ड्रॉपलेट्स के माध्यम से एक मरीज से दूसरे मरीज में संक्रमित होता है। यह जीवाणु से फैलता है। मुख्य रूप से माइक्रोबैकटीरियम ट्यूबरक्लोसिस से। यह आम तौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है, किंतु यह केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र, लिम्फतंत्र, संचार तंत्र, मूत्रजनन तंत्र, हड्डियां, जोड़ यहां तक की त्वचा को भी प्रभावित करता है। यदि इसका इलाज नहीं मिले तो आधे से अधिक रोगी काल का ग्रास बन जाते हैं। डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व की एक तिहाई आदमी के शरीर में इस रोग का संक्रमण पाया जाता है। प्रति एक सेकंड में 1 नया संक्रमण भी होता है।




