कैमूर/भभुआ(ब्रजेश दुबे):
राष्ट्रीय गौरव दिवस के उपलक्ष्य में सरदार वल्लभभाई पटेल कॉलेज में शोध एव विकास सेल के तत्वाधान में जनजातीय गौरव : बिरसा मुंडा नामक विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया । मुख्य वक्ता के रूप में भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अखिलेंद्र नाथ तिवारी ने बिरसा मुंडा के जीवन चरित और उनके आन्दोलन पर चर्चा की । उन्होंने बिरसा मुंडा के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्रांति के सभी आयामों पर प्रकाश डाला जिसे “मुंडा उलगुलान” कहा जाता है। मात्र 19 वर्ष की उम्र में बिरसा मुंडा ने आदिवासियों के पारंपरिक भूमि अधिकार बहाल करने हेतु जो संघर्ष शुरू किया। उसका नारा था “रानी का राज खत्म करो, हमारा साम्राज्य स्थापित करो” । 1895 में उन्हें अंग्रेजो ने उन्हें दो वर्ष के लिए जेल में डाल दिया पर उनकी जगाई हुई चेतना ने छोटानागपुर में स्वतंत्रता आंदोलन की नीव रखी। मात्र 25 वर्ष की उम्र में उन्होंने 9 जून 1900 को शरीर त्यागा लेकिन तब तक वे बिरसा मुंडा से भगवान बिरसा मुंडा हो चुके थे। उन्ही के संघर्षों का परिणाम था कि 1908 में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम बहाल हुआ। उनकी मृत्यु के 25 वर्षो तक उनके द्वारा शुरू सफेद झंडे के तहत आंदोलन जारी रही। बाद में देश आजाद हुआ और 15 नवंबर 2000 को भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिन पर झारखंड राज्य की स्थापना हुए जिसे गौरव दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
दूसरे वक्ता हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ रबिंद्र कुमार ने बिरसा मुंडा के धर्म – संस्कृति के प्रति झुकाव और उनके आदर्शो पर प्रकाश डाला । इस कार्यक्रम का संचालन शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के समन्वयक डॉ अजीत कुमार राय ने किया । इस कार्यक्रम में एक उलगुनान नामक लघु फिल्म को दिखाया गया । इस अवसर पर आंतरिक गुणवत्ता एवं निश्चयन प्रकोष्ठ के समन्यवक डॉ सुमित कुमार राय, डॉ केश्वर प्रसाद भारती, डॉ सैयद अशहद करीम एवं छात्र छात्राएं उपस्थित थे । तकनीकी टीम के रूप में अनूप, ओमप्रकाश , आदित्य और पंकज उपस्थित थे ।




