रिपोर्ट -अनमोल कुमार!:-
बस, चाचा पारस को एनडीए से बाहर करने की शर्त पर फंसा है पेंच
लोजपा प्रवक्ता ने कहा-जरूर आएगी ‘खुशखबरी‘
नई दिल्ली : कभी खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान बताने वाले सांसद चिराग पासवान को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करने को लेकर बातचीत लगभग तय हो चुकी है। धार्मिक मान्यताओं के तहत भादो और पितृपक्ष में कोई शुभ काम नहीं होता। इसलिए संभवत: वह अक्टूबर में वह शपथ ले सकते हैं। बता दें कि पिछले दिनों एनडीए में शामिल होने के लिए चिराग ने कुछ शर्तें रखी थी, जिसमें सबसे पेचीदा उनके चाचा पशुपति पारस से संबंध न रखना है। इसे लेकर ही पेंच फंसा हुआ है। बाकी सब शर्ते मानने को भाजपा नेतृत्व तैयार है।
हालांकि, इस मामले में बिहार के भाजपा नेताओं ने कहा कि यह पूरा मामला केंद्रीय नेतृत्व का है, लेकिन लोजपा (रामविलास) की तरफ से चिराग की होने वाली ताजपोशी की खबर पर मुहर लगा दी है।
दरअसल, नीतीश कुमार के एनडीए से अलग होकर महागठबंधन के साथ जाते ही भाजपा बिहार में अकेली हो गई थी। जदयूके नुकसान की काफी हद तक भरपाई रामविलास पासवान की पार्टी और उनके बेटे चिराग पासवान ही कर सकते थे। पुराने सहयोगी होने की वजह से चिराग को एनडीए में आने से कोई परहेज नहीं था, लेकिन कुछ शर्तें थीं। भाजपा ने अधिकतर शर्तों को मान लिया है।
सबसे बड़ी शर्त चिराग के चाचा और केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस को एनडीए से बाहर का रास्ता दिखाने की थी। इस पर कम ही संभावना है कि भाजपा माने, क्योंकि पारस के साथ चार और सांसद है। यदि रामविलास का परिवार अलग-अलग होकर लोकसभा में लड़ता है तो एनडीए को ज्यादा फायदा नहीं होगा। भाजपा चिराग को इस पर मना सकती है। हालांकि, अब तक इस पर बात बनी है या नहीं, दोनों तरफ का वरिष्ठ नेतृत्व इस पर फिलहाल कुछ नहीं बोल रही है।
चिराग पासवान की लोजपा लोक के प्रदेश प्रवक्ता प्रोफेसर विनित सिंह ने भी माना कि चिराग पासवान के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने की खबर में जान है, बस सही समय का इंतजार है। अभी भादो का महीना चल रहा है। फिर पितृपक्ष की शुरुआत हो जाएगी। इसके बाद निश्चित तौर पर खुशखबरी आएगी। फिर आधिकारिक तौर पर सबको इसकी जानकारी दी जाएगी।
पार्टी प्रवक्ता के मुताबिक, चिराग पासवान ने जिन शर्तों को भाजपा के सामने रखा था। वो आज भी कायम हैं। 95 फीसदी बातों को भाजपा की ओर से मान लिया गया है। सिर्फ 5 प्रतिशत ही बाकी हैं। पेंच सिर्फ एनडीए गठबंधन में शामिल और केंद्रीय मंत्री चाचा पशुपति कुमार पारस को लेकर फंसा है। इन्हें इस गठबंधन से बाहर का रास्ता दिखाना ही होगा। क्योंकि, इन्होंने न सिर्फ लोजपा को तोड़ा, बल्कि पासवान परिवार को भी तोड़ दिया।
वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जदयू का एनडीए में एंट्री का दरवाजा हमेशा के लिए बंद करने के बारे में कई भाजपा नेता खुलेआम बोल चुके है।
केंद्रीय मंत्री की भूमिका सफल?
लोजपा प्रवक्ता ने एक केंद्रीय मंत्री का बिना नाम लिए बताया कि वो लगातार चिराग पासवान से एनडीए में शामिल होने के मुद्दे पर बात कर रहे थे, लेकिन हमारी कुछ शर्तें थीं। जिसे उनके सामने पहले ही रखा गया था। लोजपा (रामविलास) कभी भी भाजपा के विरोध में नहीं रही है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी चिराग पासवान के आदर्श रहे हैं। नीतीश कुमार के दबाव में भाजपा का जो रवैया पिछले दिनों रहा, उससे हम लोग क्षुब्ध जरूर थे। एनडीए से नीतीश कुमार के चले जाने के बाद फिर से भाजपा की आंख खुली है तो हम लोग भी उनके साथ फिर से जाने के लिए तैयार है।




