बेगूसराय में पंडित राजकुमार शुक्ल की 147 वीं जयंती मनाई गई

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प्रशांत कुमार की रिपोर्ट :-

बेगुसराय में भारत को सैंकड़ो वर्षों की गुलामी से आजाद कराने में चंपारण सत्याग्रह के प्रणेता पंडित राजकुमार शुक्ल का योगदान अतुलनीय अविस्मरणीय व अविश्वसनीय है। महान किसान नेता व चंपारण सत्याग्रह के प्रणेता पंडित राजकुमार शुक्ल का 147 वाँ जयंती आज नमक सत्याग्रह गौरव यात्रा समिति,बेगूसराय के तत्वावधान में रेलवे-स्टेशन के सामने श्रीकृष्ण मारवाड़ी भोजनालय परिसर में उनकी जन्म जयंती मनाई गई. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सामजिक कार्यकर्ता विष्णु देव सिंह ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में चंपारण सत्याग्रह एक बहुत ही बड़ा टर्निंग पॉइंट था. ऐसे महानायक को देश ने शायद वह सम्मान नहीं दिया, जिसके वह वाजिब हकदार थे. अधिवक्ता राजेंद्र महतो ने प्रतिवर्ष उनकी जयंती स्कूलों में मनाने की परंपरा शुरू करने की मांग की. संचालन करते हुए मुकेश विक्रम यादव ने कहा कि समिति लगातार शुक्ल जी को उचित सम्मान दिलवाने के लिए सदैव प्रयासरत है और रहेगा. बेगूसराय विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी नीरज देव ने घोर अभाव और ब्रिटिश हुकूमत के अत्याचार के बीच उनके संघर्ष पर प्रकाश डाला और नयी पीढ़ी को उनसे प्रेरणा लेने का आग्रह किया. सह संयोजक राम सेवक स्वामी यादव ने शुक्ल जी की स्मृतियों को और उनके योगदान को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में उचित स्थान देने की मांग की। को-ऑपरेटव कॉलेज छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष आयुष ईश्वर ने शुक्ल जी को भारत रत्न देने की मांग की. ABVP नेता मनीष भारद्वाज ने गांधी जी को महात्मा बनाने वाले महामानव के सम्मान में राष्ट्रीय स्तर पर एक स्मारक बनाने की मांग की.
युवा नेता जयंत कुमार ने कहा कि हर सरकारी-गैर सरकारी शैक्षणिक संस्थाओं में ऐसे महापुरुषों की जयंती-पुण्यतिथि पर राजकीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किया जाय. तथा उनकी जीवनी पढ़ाया जाय.
समिति के राष्ट्रीय महासचिव राजीव कुमार ने कहा कि हमलोगों ने महान किसान नेता व चंपारण सत्याग्रह के प्रणेता पंडित राजकुमार शुक्ल जी के सम्मान में समिति के द्वारा पूर्व में किए गए कार्यो पर प्रकाश डाला. श्री कुमार ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शुक्ल जी की स्मृतियों को चंपारण में सहेजने के प्रयासों की सराहना की, पर बिहार सरकार से अनुरोध किया कि आधा-अधूरा कार्यों को अविलंब पूरा किया जाय. उन्होंने भारत सरकार से संपूर्ण भारत में शुक्ल जी के सम्मान में स्कूली शिक्षा में उनकी जीवनी को शामिल करने तथा आधिकारिक तौर पर जयंती-पुण्यतिथि मनाने की परंपरा शुरू करने की मांग की।

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