रिपोर्ट -पुरूषोतम कुमार जमुई
जमुई जिला के खैरा थाना क्षेत्र घन बेरिया गांव में अंग्रेजों के लिए हमेशा सिरदर्द बने रहे सीताराम सिंह
दिल दिया है जान भी देंगे ए वतन तेरे लिए इन्हीं गीतों के जजबात को अपने दिल में अंगारों को शोला की तरह भड़काए खैरा के धनबेरिया निवासी सीताराम सिंह आजादी की लड़ाई में सर पर कफन बांध कर कूद गए
जमुई जिला के खैरा थाना क्षेत्र के घन बेरिया गांव निवासी सीताराम सिंह देशभक्ति का भाव और अंग्रेजों से लड़ाई का गुर श्री कृष्ण सिंह के साथ रहकर स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों को हिंदुस्तान से भगाने के लिए लड़ते रहे सीताराम सिंह का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था अंग्रेजों के वहीं दूसरी ओर जुल्म को देखकर उन्होंने 1938 श्री कृष्ण सिंह के साथ आजादी की लड़ाई में कूद पड़े सीताराम सिंह को 4 पुत्र और एक पुत्री बड़े केदार सिंह दूसरे नंबर पर शेखर सिंह तीसरे परमानंद सिंह विनोद सिंह एवं पुत्री उषा देवी स्वर्गीय सीताराम सिंह की पत्नी उमा देवी का कहना है कि
गोरे चेहरे वाले अंग्रेज कई बार उनके घर पर आकर अनाज तथा अन्य सामान उठाकर ले जाते थे और जो भी सीताराम सिंह की मदद करता था अंग्रेज इस पर जुल्म करते उसके साथ मारपीट करते थे उमा देवी ने बताया कि अंग्रेजों ने उनके घर को भी नस्ट कर दिया था स्वतंत्रता सेनानी सीताराम सिंह कई बार अंग्रेजों का आमने सामने मुकाबला कर अंग्रेजों को छती पहुंचाया कई बार अंग्रेजों ने सीताराम सिंह के ऊपर ₹500 का इनाम भी रखा
स्वतंत्रता सेनानी के पत्नी उमा देवी बताती है कि एक बार सीताराम सिंह को जनेऊ चढ़ा था और वह सो रहे थे इसी दौरान अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ लिया और उठाकर ले गए उधर सीताराम सिंह जेल में है और इधर घर की स्थिति डामाडोल घरों में अनाज नहीं थे छोटे-छोटे बच्चे थे जो कई दिनों तक भूखे रह जाते उनके पुत्र कहते हैं कि अंग्रेज अनाज को जला देते थे या जो भी मदद करता है उसके साथ क्रूरता के साथ पेश आते हैं सीताराम सिंह के परिवार वाले बताते हैं उन्होंने श्री कृष्ण सिंह के साथ रहकर, आजादी की लड़ाई लड़ी और उन्हें डॉ राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण यादव तथा अन्य लोगों का सपोर्ट की धारा




