नवादा से अमित शर्मा की रिपोर्ट
आज मैं नवादा के एक ऐसे व्यकि की कहानी बताने जा रहा हु, जो किसी परिचय के मोहताज नहीं है। ये है सुरेश भट, जो जेपी आंदोलन के सबसे प्रखर नेताओं में से एक रहे और लालू यादव से लेकर नीतीश कुमार जैसे तमाम नेता जो जेपी आंदोलन की उपज रहे। उन सब में कहीं ना कहीं सुरेश भट की एक अलग पहचान थी। इन सब मे कई लोग सत्ता के हो गए और कामयाब भी रहे। लालू यादव कई बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। आज नीतीश कुमार भी मुख्यमंत्री हैं। लेकिन दुर्भाग्य की बात है की सुरेश भट की किसी ने सुध नहीं ली और वर्ष 2012 मैं सुरेश भट की मृत्यु भी उपेक्षा में हो गई। सरकार चाहे लालू की रही हो या नीतीश की, कभी भी सुरेश भट की परवाह नहीं की। आज सुरेश भट हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन उनकी विधवा पत्नी सरस्वती भट्ट आज सरकार की उपेक्षा का दंश झेल रही है और पेंशन के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही है। वे कहती हैं कि कई बार पेंशन के लिए सरकार से भी गुहार लगाई है। आइए सुनते हैं क्या करती हैं सुरेश भट की विधवा पत्नी




