रिपोर्ट- अमित कुमार!
गया जी में पिंडदान करने पहुंची कीव, यूक्रेन की यूथकेश्वरी राधा देवी दासी ने इस्कॉन की व्यवस्थाओं की सराहना की और पिंडदान के आध्यात्मिक महत्व के बारे में बताया।
कीव, यूक्रेन से आईं यूथकेश्वरी राधा देवी दासी इस्कॉन और कृष्ण भावनामृत परंपरा का पालन करती हैं। गया जी में पिंडदान के अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें यहाँ बहुत अच्छा लग रहा है। इस्कॉन मंदिर द्वारा तीर्थयात्रियों के ठहरने और पिंडदान अनुष्ठान कराने में जो सहयोग और व्यवस्थाएं दी गई हैं, वह सराहनीय है।
उन्होंने बताया कि वे श्रीमद्भागवतम और अपने आध्यात्मिक गुरु चैतन्य चंद्र चरण प्रभु से इस परंपरा और इसके नियमों के बारे में जानती हैं। वे भगवद्गीता और चैतन्य चरितामृत जैसे ग्रंथों का भी अध्ययन करती हैं।
यूथकेश्वरी ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार गया में पिंडदान करने से न केवल दिवंगत पूर्वजों और रिश्तेदारों को सद्गति मिलती है और उनके बुरे कर्म नष्ट होते हैं, बल्कि जीवित परिजनों को भी इसका लाभ मिलता है।
उन्होंने बताया कि वह 15 से अधिक बार भारत आ चुकी हैं और आध्यात्मिक स्थलों की यात्रा के लिए समूह प्रबंधित और आयोजित करती हैं।
बाईट : यूथकेश्वरी राधा देवी दासी, कीव यूक्रेन




